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मां दुर्गा को अंतिम विदाई देते लोग।
– फोटो : अमर उजाला
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दरभंगा जिला के जाले थाना क्षेत्र के जालेश्वरीस्थान में आयोजित 64वें दुर्गा पूजा महोत्सव की प्रतिमाओं की विसर्जन यात्रा मंगलवार की शाम 5.30 बजे से बुधवार की रात 8.30 बजे तक 27 घंटे में मात्र एक किलोमीटर तक (गांधी चौक) ही चल पाई थी। इसमें इलाके के लगभग 25 हजार महिला एवं पुरुष श्रद्धालु शामिल थे। जालेश्वरीस्थान से प्रतिमा विसर्जन स्थल जाले सुखाई पोखर तक की दूरी मात्र डेढ़ किलोमीटर की है। वर्ष 2022 में विसर्जन यात्रा 29 घंटे तक चली थी।
इस वर्ष पिछला सभी रिकॉर्ड टूटने की संभावना है। पूजा समिति के अध्यक्ष रतन कुमार मेहता ने बताया कि प्रतिमा का विसर्जन देर रात 12.30 बजे तक संपन्न हुआ। इस बार कुल 31 घंटे का समय प्रतिमा विसर्जन में लगा है। उन्होंने कहा कि जालेश्वरीस्थान की दुर्गा पूजा की प्रतिमा विसर्जन यात्रा कम दूरी में अधिक समय तक चलने वाली विसर्जन यात्रा और उत्कृष्ट झिझिया नृत्य-संगीत प्रदर्शन के लिए वर्षों से प्रसिद्ध है।
वाहनों को वैकल्पिक रास्ते से निकलवाने में मदद कर रहे थे
यह एक अनोखी विसर्जन यात्रा है जिसके साथ साथ सजा-धजा मेला भी अपने रूप रंग में चलता रहता है। एसएच- 97 में जाले शंकर चौक से सुखाई पोखर तक प्रतिमा विसर्जन यात्रा के लंबे समय तक सड़क पर रहने की वजह से जाले-भरवाड़ा सड़क में यातायात बाधित रहती है। इससे इलाके के लोगों को परेशानी भी होती है। स्थानीय पुलिस प्रशासन एवं पूजा समिति के स्वयंसेवक मंगलवार की रात से सड़क से गुजरने वाले लोगों एवं वाहनों को वैकल्पिक रास्ते से निकलवाने में मदद कर रहे थे।
तीन दशक पहले पहले टायरगाड़ी से विसर्जन यात्रा चलती थी
माता जालेश्वरी दुर्गा पूजा समिति के अध्यक्ष रतन कुमार मेहता कहते हैं कि तीन दशक पहले पहले टायरगाड़ी से विसर्जन यात्रा चलती थी, जो रात के 12 से दो बजे तक संपन्न हो जाया करती थी। लेकिन, पिछले साढ़े तीन दशकों से वाहनों से प्रतिमा विसर्जन की यात्रा शुरू होने और बड़ी संख्या में इलाके की महिला श्रद्धालुओं की ओर से झिझिया नृत्य का घंटों प्रदर्शन किए जाने से विसर्जन यात्रा में अत्यधिक समय लगता चला आ रहा है। समिति के सचिव देव नारायण महथा उर्फ देबू महथा कहते हैं कि पूजा समिति की ओर से एकादशी की अहले सुबह तक प्रतिमाओं के विसर्जन का लक्ष्य रखा गया था, लेकिन ग्रामीण महिलाओं का मानना है कि दशमी से शुरू माता की विसर्जन यात्रा एकादशी के उत्तरार्द्ध में संपन्न करने से माता अधिक प्रसन्न होती हैं और इसका विशिष्ट फलाफल प्राप्त होता है।
मात्र डेढ़ किलोमीटर की दूरी तय करने में 30 घंटे तक का समय लगता है
विसर्जन यात्रा के साथ-साथ कई दुकानें भी चल रही थीं। यह पहली ऐसी विसर्जन यात्रा है जिसके साथ खाने-पीने एवं खिलौने की दुकानें चलती हैं। विसर्जन यात्रा को देखने के लिए इलाके के श्रद्धालुओं की अपार भीड़ उमड़ी थी। संप्रति देश की यह पहली ऐसी प्रतिमा विसर्जन यात्रा है, जिसे मात्र डेढ़ किलोमीटर की दूरी तय करने में 30 घंटे तक का समय लग जाता है। देश में सबसे लंबे समय तक सड़क पर झिझिया नृत्य प्रदर्शन का रिकॉर्ड भी जाले की प्रतिमा विसर्जन यात्रा का रहा है।
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