Bihar Caste Census: आर्थिक गणना की रिपोर्ट नहीं आई, सीएम नीतीश कुमार ने बताया कब आएगी, फिर क्या करेंगे

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Bihar Caste Census: CM Nitish Kumar said that the economic census report will come after one and a half month

बिहार जाति जनगणना रिपोर्ट
– फोटो : AMAR UJALA

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सुप्रीम कोर्ट में जिस सामाजिक आर्थिक सर्वे कराने की बात मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की सरकार ने कही थी, उसकी रिपोर्ट डेढ़ महीने बाद आएगी। यह रिपोर्ट बिहार विधानमंडल में पेश की जाएगी। यानी जाति आधारित गणना की पूरी रिपोर्ट आने में डेढ़ माह का समय लगेगा। इसमें आर्थिक सर्वेक्षण के आंकड़े भी शामिल किए जाएंगे। इस बात की घोषणा खुद मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने सर्वदलीय बैठक के दौरान की। 

बिहार सरकार का मकसद है कि सभी का विकास करना

सीएम नीतीश कुमार ने सभी दलों के प्रतिनिधि से कहा कि जाति आधारित गणना की रिपोर्ट में सभी वर्गों के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई है। सर्वे टीम ने ठीक ढंग से काम किया है। एक-एक चीज का बारिकी से सर्वे किया गया है। इसमें हर किसी की जाति की जानकारी, उनके परिवार की जानकारी, आर्थिक सर्वे, परिवार के शैक्षणिक स्थिति की जानकारी ली गई है। आगे सभी दलों की सहमति से आम लोगों के विकास के लिए काम किया जाएगा। बिहार सरकार का मकसद है कि सभी का विकास करना और उन्हें निरंतर आगे बढ़ाना। 

हड़बड़ी में जाति आधारित गणना की रिपोर्ट तैयार गई है

इतना ही नहीं सीएम नीतीश कुमार ने सभी दलों के प्रतिनिधि को जाति आधारित गणना पर सभी धर्म, जाति के लोगों का विवरण समेत 17 प्रश्नों प्रश्न पर पूरी जानकारी दी। हालांकि, भाजपा, हम और एआईएमआईएम पार्टी के प्रतिनिधियों ने आरोप लगाया कि हड़बड़ी में जाति आधारित गणना की रिपोर्ट तैयार गई है। महागठबंधन सरकार यह मैकेनिज्म समझाए कि कैसे उन्होंने इस रिपोर्ट को तैयार किया है। इस रिपोर्ट कुछ नया नहीं है। कई जातियों को गिनती वास्तविक नहीं है। सर्वे टीम ने ठीक से काम किया या नहीं, इसी पड़ताल जरूर होनी चाहिए। 

अलग-अलग समाज के लोग सवाल उठा रहे हैं

मंगलवार को बैठक के बाद भाजपा ने कहा कि “सर्वदलीय बैठक में हमलोगों ने अपनी आपत्तियों को दर्ज कराया। उन्हें बताया कि खामी और कमी क्या रह गई है। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को कहा कि इसे देख लीजिए।” आंकड़ों से छेड़छाड़ को लेकर क्या कहा, इस सवाल के जवाब में सिन्हा ने कहा- “आपत्ति सिर्फ हमारी नहीं। सब लोग उठा रहे हैं। पूर्व डिप्टी सीएम, विधान परिषद् के नेता ने भी आपत्ति की है। हमने कहा कि इसपर आपत्ति दर्ज कराने का अवसर मिलाना चाहिए।” कायस्थों को 0.6 प्रतिशत रखे जाने और किन्नरों की संख्या कम किए जाने को लेकर क्या बात हुई, इस सवाल के जवाब में उन्होंने कहा- “आपत्ति का अवसर मिलना ही चाहिए। अलग-अलग समाज के लोग सवाल उठा रहे हैं। उन्हें आपत्ति का अवसर भी मिलना चाहिए और निष्पादन भी होना चाहिए। यही बात वहां रखी है।”

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