Bihar Caste Census : पटना हाईकोर्ट में जाति जनगणना पर सुनवाई हुई, अगली तारीख के लिए फैसला रखा सुरक्षित

[ad_1]

Bihar Caste Census: Hearing on caste census held in Patna High Court, decision reserved for next date

पटना हाईकोर्ट।
– फोटो : Amar Ujala

विस्तार


पटना हाईकोर्ट में जाति आधारित जनगणना को लेकर शुक्रवार को भी सुनवाई हुई। चीफ जस्टिस के विनोद चंद्रन व जस्टिस पार्थ सार्थी की खंडपीठ ने लगातार पांच दिनों तक (3 जुलाई से लेकर 7 जुलाई तक) इस मामले में याचिकाकर्ता और बिहार सरकार की दलीलें सुनीं। इसके बाद फैसला अगली तारीख के लिए सुरक्षित रख लिया। अब कोर्ट अगली तारीख को अपना फैसला सुनाएगी। 

दरअसल, हाईकोर्ट ने बिहार सरकार की ओर से बताई जा रही ‘जाति आधारित गणना’ को प्रथम दृष्टया जाति आधारित जनगणना माना था और इसपर अंतरिम रोक लगाई थी। इस रोक के बाद अगली तारीख तीन जुलाई दी गई थी। हाईकोर्ट के अंतरिम रोक के फैसले के खिलाफ राज्य सरकार सुप्रीम कोर्ट गई, लेकिन राहत नहीं मिली।

अंतिम फैसला आए बगैर सुप्रीम कोर्ट में कोई सुनवाई नहीं होगी

सुप्रीम कोर्ट ने 19 मई को तीसरी बार बिहार की जाति आधारित जन-गणना के केस को पटना हाईकोर्ट के पास भेजा था। दो बार जनहित के नाम पर याचिका पहुंचने पर सुप्रीम न्यायालय ने इसे हाईकोर्ट का केस बताते हुए वापस किया था। इसके बाद पटना हाईकोर्ट में सुनवाई हुई और यहां 04 मई को अंतरिम फैसला राज्य सरकार के खिलाफ आया। कोर्ट ने जाति आधारित जनगणना प्रक्रिया पर अंतरिम रोक लगाते हुए 04 मई तक जुटाए सभी डाटा को सुरक्षित रखने का आदेश दिया था। पटना हाईकोर्ट से अपने खिलाफ अंतरिम आदेश को देखकर बिहार की नीतीश सरकार अगली तारीख का इंंतजार किए बगैर सुप्रीम कोर्ट पहुंच गई थी। सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट कहा- “पटना हाईकोर्ट के अंतरिम फैसले में काफी हद तक स्पष्टता है, लेकिन अंतिम फैसला आए बगैर सुप्रीम कोर्ट में कोई सुनवाई नहीं होगी। 

सरकार को अपने खिलाफ फैसले का अंदेशा था

पटना हाईकोर्ट ने 04 मई को जहां तक सुनवाई कर अंतरिम आदेश दिया, उससे आगे अब 03 जुलाई को बहस शुरू होगी। पिछली दफा राज्य सरकार का पक्ष हाईकोर्ट में बहुत मजबूती से नहीं दिखा था और यह बात भी सामने आई थी कि सरकार को अपने खिलाफ फैसले का अंदेशा था। यही कारण है कि राज्य सरकार ने अंतरिम फैसले के बाद 03 जुलाई की तारीख लंबी बताकर एक बार यह भी अपील की थी कि जल्दी सुनवाई कर अंतिम फैसला दे दिया जाए। तारीख की अवधि घटाने को लेकर सरकार की याचिका बेकार गई थी। कोर्ट ने इसमें भी कोई राहत नहीं दी थी।

[ad_2]

Source link

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *