Bihar News : इस खबर को पढ़कर समझिए बिहार के किस शहर में रहना कितना जानलेवा, सालभर की प्रदूषण रिपोर्ट देखें

[ad_1]

Bihar News : Pollution Status of Bihar cities, Bihar city wise pollution in 2023, most polluted city of bihar

बिहार के प्रदूषित शहरों की स्थिति।
– फोटो : अमर उजाला

विस्तार


बिहार में वायु प्रदूषण नियंत्रण के लिए राज्य और केंद्र सरकार की कोशिशों का दावा खूब हो रहा है, लेकिन हकीकत एक रिपोर्ट में सामने आयी है। यह रिपोर्ट सेंटर फॉर रिसर्च ऑन एनर्जी एंड क्लीन एयर (सीआरईए) ने जारी की है। इसके मुताबिक बेगूसराय, छपरा और पटना देश के सबसे अधिक प्रदूषित शहरों में शामिल हैं। वहीं, बिहार के 19 शहर ऐसे हैं जो कि देश से टॉप 50 प्रदूषित शहर हैं। पर्यावरणविद् का कहना है कि बिहार के इन शहरों में वायु प्रदूषण में वृद्धि चिंता का विषय है।

सीआरई की रिपोर्ट में बताया गया कि बेगूसराय में 265 माइक्रोग्राम प्रति घनमीटर, छपरा 212 माइक्रोग्राम प्रति घनमीटर और पटना 212 माइक्रोग्राम प्रति घनमीटर के स्तर पर प्रदूषित रहते हुए भारत के सर्वाधिक दस प्रदूषित शहरों की सूची में शामिल हुए हैं। देश के सर्वाधिक प्रदूषित 50 शहरों में बिहार के कुल 19 शहर शामिल हैं। अन्य राज्यों की तुलना में सबसे अधिक संख्या में बिहार के शहरों का प्रदूषित शहरों की सूची में होना बेहद चिंता का विषय है। वर्ष 2020 तक बिहार में केवल 5 शहरों में ही वायु गुणवत्ता जांची जाती थी। इनमें पटना, मुजफ्फरपुर, हाजीपुर, गया और औरंगाबाद शामिल थे। अब इस लिस्ट में 18 अन्य शहरों को जोड़ लिया गया है और वर्तमान में कुल 23 शहरों में वायु गुणवत्ता की निगरानी की जा रही है।

केंद्र सरकार के राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम से बाहर है

पिछले एक साल में कुल 346 दिन इन सभी 23 शहरों में वायु गुणवत्ता का हाल, मानक से खराब रहा है। इन 23 में से 20 शहर अब भी केंद्र सरकार के राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम से बाहर है। राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम (एनसीएपी) की घोषणा के पांच वर्ष पूर्ण होने पर सीआरईए द्वारा जारी इस विश्लेषणात्मक रिपोर्ट में यह पाया गया कि सरकार द्वारा घोषित इस कार्यक्रम के लक्ष्यों को हासिल करने में कमी रहने पर किसी भी प्रकार की सजा का प्रावधान नहीं होने से काफी लापरवाहियां हुई हैं। इसी कारण लक्ष्य पूरा नहीं हो रहा है।

वायु गुणवत्ता विश्व स्वास्थ्य संगठन के मानकों की तुलना में खराब

वर्ष 2023 में इन सभी 23 शहरों में से 16 शहर ऐसे थे, जहां लगभग 90 प्रतिशत दिनों की वायु गुणवत्ता विश्व स्वास्थय संगठन के मानकों की तुलना में खराब थी। इनमें से 11 शहरों की वायु गुणवत्ता पिछले एक वर्ष में सत्तर प्रतिशत दिन राष्ट्रीय मानकों की तुलना में खराब रही हैं। केवल सासाराम और मंगुराहा (वन्य क्षेत्र- वाल्मीकि टाइगर रिजर्व) की वायु गुणवत्ता पिछले एक वर्ष के दौरान 50 प्रतिशत दिनों राष्ट्रीय मानकों के मुकाबले ठीक रहीं। 

प्रवृत्ति को उलटने के लिए ऐसा पुनर्मूल्यांकन जरूरी

द क्लाइमेट एजेंडा की निदेशक एकता शेखर का कहना है, बिहार में खतरनाक प्रदूषण स्तर दर्ज करने वाले गैर- एनसीएपी शहरों की बड़ी संख्या में उपस्थिति व्यापक वायु गुणवत्ता संबंधी चिंताओं को उजागर करती है, जो इस कार्यक्रम के अंतर्गत जोड़े गए शहरों की सूची का पुनर्मूल्यांकन करने, इस सूची को पुनः तैयार करने और इन शहरों के लिए स्वच्छ वायु कार्ययोजना बनाने जैसी की आवश्यकताओं पर बल देती है। हाल ही में परिवेशी वायु गुणवत्ता की निगरानी करने वाले लेकिन निर्धारित मानकों से ऊपर प्रदूषण स्तर दर्ज करने वाले शहरों में बढ़ते वायु प्रदूषण के स्तर की प्रवृत्ति को उलटने के लिए इस तरह का पुनर्मूल्यांकन महत्वपूर्ण है।

भागलपुर और सहरसा भारत के दूसरे-तीसरे सबसे प्रदूषित शहर थे

सुनील दहिया कहते हैं- “अब समय आ गया है कि एनसीएपी को हालिया निगरानी डेटा के आधार पर एनसीएपी के तहत नए शहरों को शामिल करने के लिए पुनर्मूल्यांकन किया जाए और एनसीएपी के तहत ऐसे सभी शहरों को जिम्मेदारी साझा करते हुए शहर की सीमाओं के भीतर प्रदूषणकारी क्षेत्रों के लिए वार्षिक उत्सर्जन भार कटौती लक्ष्य प्रदान किए जाएं।” सीआरईए के जनवरी 2024 वायु गुणवत्ता सैपशॉट के अनुसार, दिल्ली के बाद शीर्ष स्थान पर भागलपुर और सहरसा भारत के दूसरे और तीसरे सबसे प्रदूषित शहर थे। स्नैपशॉट में उल्लेख किया गया है कि बिहार के कुल 11 शहर जनवरी 2024 में भारत के दैनिक शीर्ष 10 सबसे प्रदूषित शहरों की सूची में कम से कम एक बार शामिल हुए। इनमें भागलपुर (28 बार), सहरसा (21 बार), छपरा (13 बार), राजगीर (आठ बार), अररिया (सात बार), आरा (छह बार), पटना (चार बार), किशनगंज (एक बार), पूर्णिया (एक बार), समस्तीपुर (एक बार), और मुजफ्फरपुर (एक बार) शामिल हुए।

[ad_2]

Source link

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *