Bihar News : घट गई बिहार की गरीबी; केंद्र की रिपोर्ट का हवाला देकर बिहार सरकार ने अपनी पीठ इस आधार पर थपथपाई

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Bihar News : bihar government praise CM Nitish Kumar, minimized poverty as per Multidimentional Poverty Index

प्रेस कांफ्रेंस करते बिहार सरकार के मंत्री और अधिकारी।
– फोटो : अमर उजाला

विस्तार


जब से बिहार के महागठबंधन सरकार बनी है, राज्य सरकार केंद्र की रिपोर्टों से इत्तेफाक नहीं दिखाती। लेकिन, अब एक रिपोर्ट के हवाले से सरकार अपनी पीठ थपथपा रही है। इस रिपोर्ट के हवाले से बताया जा रहा है कि बिहार में गरीबी घट गई, गरीब घट गए। बिहार सरकार के मंत्री विजेंद्र यादव ने शुक्रवार दोपहर इस मामले को लेकर एक प्रेस कॉफ्रेंस की। इसमें उन्होंने रिपोर्ट जारी की, उसे ‘अमर उजाला’ जस के तस आपके सामने पेश कर रहा है। बिहार सरकार के अनुसार, बिहार राज्य ने गरीबी की गिरावट में रिकार्ड बनाया है। नीति आयोग ने 17 जुलाई 2023 को बहुआयामी गरीबी सूचकांक का प्रतिवेदन जारी किया है। नीति आयोग के इस रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2015-16 से वर्ष 2019-21 की अवधि में पूरे भारत में 13.51 करोड़ लोग गरीबी से बाहर आये है जबकि बिहार राज्य में अकेले 2.25 करोड़ लोग गरीबी की सीमा से बाहर हुए हैं। इस प्रकार पूरे देश में गरीबी रेखा से बाहर हुए व्यक्तियों में 16.65 प्रतिशत व्यक्ति बिहार राज्य से है।

गरीबी में सबसे अधिक गिरावट दर्ज की है

नीति आयोग द्वारा जारी बहुआयामी गरीबी सूचकांक का प्रगति प्रतिवेदन स्वास्थ्य, शिक्षा एवं बेहतर जीवन स्तर से संबंधित सुविधाओं या संसाधनों के वंचितों (Deprived ) की संख्या पर आधारित है। गरीबी की गणना के लिए राष्ट्रीय पारिवारिक स्वास्थ्य सर्वेक्षण 5 (वर्ष) 2019-21) के आंकड़ों को प्रयुक्त किया गया है। बिहार राज्य ने गरीबी में सबसे अधिक गिरावट दर्ज की है। बिहार राज्य का गरीबी प्रतिशत वर्ष 2015-16 के 51.89 प्रतिशत से घटकर 33.76 प्रतिशत हो गया है। इस प्रकार बिहार राज्य में 18.13 प्रतिशत गरीबी कम हुई है जो देश के अन्य राज्यों की तुलना में सर्वाधिक है। बिहार राज्य के ग्रामीण क्षेत्र में 2015-16 में 56 प्रतिशत गरीबी थी, जो घटकर 2019-21 में 36.95 प्रतिशत हो गयी है। इस प्रकार ग्रामीण गरीबी में 19.05 प्रतिशत की कमी हुई है। राष्ट्रीय स्तर पर ग्रामीण क्षेत्र को गरीबी की गिरावट दर (32.59% से 19.28%) 13.31 प्रतिशत हुई है। बिहार राज्य के बाद गरीबी में अधिक गिरावट दर्ज करने वाला राज्य मध्यप्रदेश, उत्तरप्रदेश, ओडीशा एवं राजस्थान है। मध्य प्रदेश में 15.94 प्रतिशत, उत्तर प्रदेश में 14.75 प्रतिशत, ओडीशा में 13.66 प्रतिशत तथा राजस्थान में 13.55 प्रतिशत की दर से गरीबी में गिरावट दर्ज की गई है। झारखंड राज्य की गरीबी में 13.29 प्रतिशत की कमी आई है।

शिक्षा, स्वास्थ्य, पेयजल, महिला विकास में प्रगति

विद्युत संपर्क, स्वच्छ रसोई ईंधन, बैक खाता खोले जाने के सूचकांकों पर बिहार राज्य की उपलब्धि देश के अन्य राज्यों की तुलना में सर्वाधिक है। स्वच्छता, पेयजल, पोषण, प्रसवोत्तर देखभाल, आवास, सम्पति के मामले में बिहार में वंचितों कमी का प्रतिशत क्रमश: 46.74%, 42.41%, 35.47%, 37.42% एवं 31.49% है, जो राज्य की तीव्र प्रगति को दर्शाता है। बिहार राज्य में शिक्षा, स्वास्थ्य, पेयजल, विद्युत संपर्क महिला विकास, संरचना निर्माण, पशु संसाधन, आय के साधनों में विस्तार, बैंकों में खाता खोलना इत्यादि में उल्लेखनीय प्रगति हुई है। बिहार सरकार के द्वारा न्याय के साथ विकास की नीति के अंतर्गत कार्यान्वित सरकार के सात निश्चय पार्ट-1 एवं पार्ट-2 की योजनाएं, कृषि रोड मैप, शिक्षा की नवाचारी योजनाएं, स्वास्थ्य के गुणवत्तापूर्ण कार्यक्रमों, इत्यादि में राज्य में समानता आधारित सतत विकास को आयाम प्राप्त हुआ। इससे राज्य में प्रति व्यक्ति घरेलू उत्पाद वर्ष 2014-15 के 39341 रुपये से बढ़कर वर्ष 2021-22 में 54383 रुपये हो गया है।

2021-22 में अन्न की उत्पादकता बढ़कर 3012 KG प्रति हेक्टेयर

स्वास्थ्य-बहुआयामी गरीबी सूचकांकअंतर्गत स्वास्थ्य प्रक्षेत्र के पोषण घटक में 2015-16 से 2019-21 की अवधि में वंचितों की संख्या में 35.47 प्रतिशत कमी आई है। राज्य में अन्न की उत्पादकता वर्ष 2005-06 के 1344 KG प्रति हेक्टयर से बढ़कर 2021-22 में 3012 KG प्रति हेक्टेयर हो गयी है। 2017-18 में खाद्यान्न का उत्पादन 16530.8 हजार टन था, जो वर्ष 2021-22 में बढ़कर 18099 हजार टन हो गया है।  वर्ष 2011-12 में दूध का उत्पादन 66.25 लाख टन था, जो 2021-22 में 121.19 लाख टन हो गया है। इसी प्रकार राज्य में अंडा का उत्पादन 2017-18 में 127.85 करोड़ से बढ़कर वर्ष 2021-22 में 306.66 करोड़ हो गया है। मछली का उत्पादन 2017-18 में 5.87 लाख टन था, जो 2021-22 में 7.62 लाख टन हो गया है।

शिशु मृत्यु दर में लगातार कमी दर्ज की गयी है

स्वास्थ्य के क्षेत्र में प्रसवोत्तर देखभाल घटक अंतर्गत वंचितों की संख्या मे 31.07 प्रतिशत की कमी आई है। 2015-16 में नवजात मृत्यु दर 42 प्रति हजार था, जो घटकर 2019-21 में 27 रह गयी है। संस्थागत प्रसव 2005-06 के 22.0 प्रतिशत से बढ़कर 2019-21 मे 76.2 प्रतिशत हो गया, जो 54.2 प्रतिशत अंको की वृद्धि दर्शाता है।  मातृ मृत्यु दर 2015-17 के 165 प्रति लाख जीवित प्रसव से घटकर 2018-20 में 118 रह गयी है, जो 47 अंको की गिरावट को दर्शाता है। शिशु मृत्यु दर में लगातार कमी दर्ज की गयी है।

2005-06 से 2021 तक 21264 नए प्राथमिक विद्यालय खोले गए

बिहार में समेकित बाल विकास सेवा के तहत पोषण का बजट 9.7 प्रतिशत की वार्षिक दर से बड़ा और 2017-18 के 1352.33 करोड़ रुपया से 2021-22 में 1896.45 करोड़ हो गया है। बेहतर पोषण से शिशुओं, बच्चों किशोरों के स्वास्थ्य में सुधार हुआ है। शिक्षा शिक्षा प्रक्षेत्र अंतर्गत स्कूली शिक्षा की अवधि तथा स्कूल में उपस्थिति दोनों ही घटकों में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। इस अवधि में 10 वर्षो उससे अधिक स्कूली शिक्षा प्राप्त करने वाली जनसंख्या में वृद्धि हुई है, जिसमें महिलाओं का प्रतिशत 2015-16 में 22.8 प्रतिशत था, जो 2019-21 में बढ़कर 28.8 प्रतिशत हो गया है। वर्ष 2016-17 में राज्य में स्कूलों की कुल संख्या 72981 थी, जो 2021 में बढ़कर 81125 हो गयी है। वर्ष 2005-06 से 2021 तक 21264 नए प्राथमिक विद्यालय खोले गए तथा 277403 अतिरिक्त वर्ग कक्ष बनाए गए।

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