Bihar News : चिराग पासवान बोले- शेर का बेटा हूं, कफन बांधकर निकला हूं; बिहार को विकसित राज्य बनाकर ही दम लूंगा

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चिराग पासवान।
– फोटो : अमर उजाला

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लोजपा (रामविलास) चिराग पासवान ने एक बार फिर से सीएम नीतीश कुमार पर हमला बोला। रविवार दोपहर SK मेमोरियल हॉल में कार्यक्रम को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि वो लोग सोच रहे थे लोजपा को तोड़ दो टूट जाएगा चिराग पासवान। लेकिन, नहीं टूटा चिराग। फिर षडयंत्र रचा कि इसको इसके घर से निकालकर सामान को बाहर निकाल दो, फिर भी नहीं टूटा चिराग पासवान। जो सोचते ऐसा सोचते हैं, वह भूल जाते है कि चिराग पासवान शेर का बेटा है। चिराग ने कहा कि मैं न झुकने वाला हूं, न टूटने वाला हूं और डरता तो मैं किसी से नहीं हूं। जिसकी ताकत आजमानी है आजमा लीजिए। मैं सिर पर कफन बांधकर निकल चुका हूं। जब तक बिहार को विकसित राज्य नहीं बना दूंगा तब तक चैन से नहीं बैठूंगा। 

चिराग का आरोप- कटिहार में प्रशासन के लोगों ने किसानों की हत्या की है

वहीं सीएम नीतीश कुमार पर हमला बोलते हुए उन्होंने कहा कि कटिहार में प्रशासन के लोगों ने किसानों की हत्या की है और बिहार सरकार हाथ पर हाथ धरे बैठी है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार विपक्षी दलों की बैठक में व्यस्त हैं लेकिन किसानों से मिलने का उनके पास समय नहीं है। नीतीश कुमार बिहार के मुख्यमंत्री के साथ-साथ गृहमंत्री भी हैं इसलिए जाकर घटनास्थल पर जाकर निरीक्षण करना चाहिए। चिराग ने आरोप लगाया कि नीतीश सरकार लाठी-डंडों और गोली से बात कर रही है। कटिहार मामले में सरकार लीपापोती करने का काम कर रही है। अब सरकार कह रही है कि किसानों की मौत गोली पुलिस की गोली से नहीं हुई है।

यह लाठी और गोली की सरकार लोगों को डराने का काम कर रही है

चिराग ने कहा कि यह लाठी और गोली की सरकार लोगों को डराने का काम कर रही है। बिहारी अपना हक मांग रहे हैं तो उनको लाठी और गोली मिल रही है। छात्र शिक्षा मांग रहे हैं तो उन पर लाठीचार्ज की जा रही है। दिल्ली की गवर्नर के साथ सभी सांसदों की बैठक में जेडीयू और आरजेडी के सांसद नहीं गए। यह एक गंभीर मसला है। गवर्नर ने उच्च शिक्षा में गुणवत्ता को लेकर बैठक बुलाई थी। लेकिन, जदयू ने इसका विरोध किया। चिराग ने कहा कि यह सही नहीं है। बिहार के हितों में इनका कोई ध्यान नहीं है। शिक्षक की बहाली में लगातार देर हो रही है। रोज नए नए नियम बदल रहे हैं, जिससे अभ्यर्थियों को काफी परेशानी हो रही है। विगत 25 सालों में किसानों की समस्या पर ध्यान की दिया गया। और न ही छात्रों की समस्या का ध्यान दिया गया है।

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