[ad_1]

जन सुराज के संयोजक प्रशांत किशोर
– फोटो : अमर उजाला
विस्तार
इन दिनों जन सुराज के संयोजक दरभंगा में हैं और वह लगातार सता पक्ष पर बरसते नजर आ रहे हैं। इस दौरान प्रशांत किशोर ने कहा कि आजादी से पहले आने क्या होता था। यहां के लोग कपास की खेती करते थे और अंग्रेज आपके द्वारा उपजाए गए कपास को इंग्लैंड में ले जाते थे। वहां से कपड़ा बनाकर भारत में लाकर बेचते आज ऐसा हाल बिहार का भी है। हम लोगों का पैसा भी बाहर जा रहा है, पढ़े-लिखे लोग भी बाहर जाकर नौकरी कर रहे हैं। वहीं हमारे यहां के लोग दूसरे राज्यों में जाकर मेहनत मजदूरी कर सामानों का निर्माण करते है जैसे सीमेंट, मोटरसाइकिल वगैरह बनाते हैं और उसे बिहार में बेचा जा रहा है। ऐसे में बिहारियों का लाभ तो होगा नहीं।
श्रम के साथ बुद्धि और पैसों का भी हो रहा पलायन
प्रशांत किशोर ने कहा कि बिहार में श्रम के साथ बुद्धि और पैसों का भी पलायन है। ये तीनों चीजें बिहार से दूसरे राज्यों में जा रही हैं। महाराष्ट्र में अगर बाइक की कोई फैक्ट्री लगी है, तो उस फैक्ट्री को जो लोन मिला है उसमें भी बिहार का पैसा लगा है। उस फैक्ट्री में जो मजदूर और इंजीनियर काम कर रहे हैं वो भी बिहार के हैं। वही, जब मोटरसाइकिल बन जाती है तो उसे भी बिहार में लाकर बेचा जाता है।
शिक्षा में भी करना होगा सुधार
प्रशांत किशोर ने कहा कि अगर बिहार में शिक्षा में सुधार कर दिया जाए और पूंजी की उपलब्धता करा दी जाए, तो यहां के लोगों में वो ताकत है कि वे अपने लिए रोजगार के अवसर पैदा कर सकते हैं। जबतक वह नहीं होगा तबतक बिहार में गरीबी-बेरोजगारी खत्म होने वाली नहीं है। बिहार में सिर्फ श्रम का पलायन नहीं है।
[ad_2]
Source link