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एचएलए कैंप की फाइल फोटो।
– फोटो : अमर उजाला
विस्तार
बिहार के गरीब तबके से आने वाले थैलेसीमिया पीड़ितों के लिए पटना के महाराणा प्रताप भवन में शुक्रवार को मुफ्त जांच शिविर लगा है। इस कैंप में मरीजों का मुफ्त बोन मैरो ट्रांसप्लांट भी करवाया जाएगा। आजीवन अपने बच्चे को हर 15 दिन में ब्लड चढ़ाने की जद्दोजहद कर रहे परिवारों के लिए मां वैष्णो देवी सेवा समिति और मां ब्लड सेंटर बिहार में तीसरी बार निःशुल्क एचएलए मैचिंग कैंप का आयोजन कर रही है। इस कैंप में 12 वर्ष से कम उम्र के वैसे बच्चे जिनके सगे भाई-बहन हैं और वह बोन मैरो ट्रांसप्लांट करवाना चाहते हैं। वह यहां अपनी जांच करवा सकते हैं। टेस्ट के बाद यदि डोनर का एचएलए रोगी के साथ सौ फीसदी मैच करता है तो उनके बोन मैरो ट्रांसप्लांट की तैयारी की जाएगी। 23 फरवरी 2020 को पहली बार और 14 जनवरी 2022 को दूसरी बार अयोजित एचएलए मैचिंग कैंप के जरिए अबतक कुल 45 बच्चों को सफ़ल बोन मैरो ट्रांसप्लांट के बाद नई जिंदगी मिली है।
मां वैष्णो देवी सेवा समिति के संस्थापक मुकेश हिसारिया ने बताया कि थैलेसीमिया पीड़ित बच्चों को अगर बोन मैरो ट्रांसप्लांट करवाना होता है तो उनका मानव ल्यूकोसाइट एंटीजन (एचएलए) परीक्षण जरूरी है। ऐसे में जर्मनी की ‘डीकेएमएस बीएमएसटी फाउंडेशन इंडिया’, डॉक्टर सुनील भट्ट तथा नारायणा हेल्थ, बंगलोर की टीम इस कैंप में अहम योगदान देती है। बच्चों का मानव ल्यूकोसाइट एंटीजन परीक्षण के लिए जर्मनी भेजा जाता है। वहां जांच के बाद यह साफ होता है कि थैलेसीमिया पीड़ित बच्चे का नमूना उसके भाई या बहन से कितना प्रतिशत मेल खाता है। अगर यह मिलान 100 प्रतिशत होता है तो हम बोन मैरो ट्रांसप्लांट के लिए आगे बढ़ते हैं।
बोन मैरो ट्रांसप्लांट का खर्च काफी अधिक
मुकेश हिसारिया ने बताया कि थैलेसीमिया पीड़ित के बोन मैरो ट्रांसप्लांट का खर्च काफी अधिक होता है। ऐसे में गरीब तबके के लोग ट्रांसप्लांट नहीं करवा पाते। इसलिए हम सब को मिलकर इस बीमारी से ग्रसित बच्चों की जिंदगी बचाने की मुहिम का हिस्सा बनना चाहिए। उन्होंने बताया कि जिन बच्चों के माता-पिता की वार्षिक आय 2.5 लाख रुपए से कम है। उनके बोन मैरो ट्रांसप्लांट के लिए कोल इंडिया लिमिटेड 10 लाख, केंद्र सरकार 3 लाख और राज्य सरकार 5 लाख तक आर्थिक मदद करती है। उन्होंने कहा कि जो भी थैलेसीमिया से पीड़ित बच्चे हैं, वो जल्द से जल्द अपना रजिस्ट्रेशन करवाने के लिए संपर्क कर सकते हैं। निःशुल्क रजिस्ट्रेशन करवाने के लिए जसवंत कुमार, (मोबाइल नंबर- 9473114054), ब्रजेश कुमार (मोबाइल नंबर- 8789416636) और सुजीत गुप्ता (मोबाइल नंबर- 8789449238) से संपर्क करें।
जानिए, थैलेसीमिया के बारे में
थैलेसीमिया बच्चों को माता-पिता से अनुवांशिक तौर पर मिलने वाला ब्लड डिसऑर्डर है। इस रोग के होने पर शरीर की हीमोग्लोबिन निर्माण प्रक्रिया में बाधित होती है, जिसके कारण एनीमिया के लक्षण दिखाई देते हैं। इसकी पहचान तीन माह की आयु के बाद ही होती है। इसमें रोगी बच्चे के शरीर में खून की भारी कमी होने लगती है, जिसके कारण उसे बार-बार बाहर से खून की आवश्यकता पड़ती है। इस बीमारी से मरीज को तभी निजात मिल सकती है जब उसके सगे भाई बहन से लेकर बोन मैरो ट्रांसप्लांट किया जाए। यह काफी खर्चीला है।
जानिए, क्या है एचएलए मैचिंग कैंप
एचएलए मैचिंग कैंप यानी मानव ल्यूकोसाइट एंटीजन (एचएलए) परीक्षण। इस कैंप में मानव ल्यूकोसाइट एंटीजन का परीक्षण किया जाएगा। थैलेसीमिया से पीड़ितों को बोन मैरो ट्रांसप्लांट करवाने से पहले इस परीक्षण यानी टेस्ट को करवाना अनिवार्य है। यह काफी महंगी जांच है और यह बिहार में नहीं की जाती है। ऐसे में मां वैष्णो देवी सेवा समिति परिवार और मां ब्लड सेंटर परिवार बिहार के थैलेसीमिया पीड़ित बच्चों को निःशुल्क कैंप के द्वारा तीसरी बार नई जिंदगी देने की कोशिश में लगा है।
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