Bihar News: पद्म भूषण बिंदेश्वर पाठक नहीं रहे, तीन दिन पहले अपने राज्य आकर की थी यह बातें

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Sulabh International organisation founder Dr bindeshwar Pathak died in AIIMS Delhi after hoisting flag

बिंदेश्वर पाठक (फाइल फोटो)।)
– फोटो : अमर उजाला

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सुलभ इंटरनेशनल के संस्थापक डॉक्टर बिंदेश्वर पाठक का मंगलवार को अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) दिल्ली में निधन हो गया। 80 साल के डॉ. बिंदेश्वर पाठक पद्म विभूषण से सम्मानित हो चुके थे। पिछले हफ्ते वे अपने गृह क्षेत्र बिहार आए थे और यहां साहित्य के कार्यक्रमों में शामिल भी हुए थे।

बिंदेश्वर पाठक का दुनियाभर में नाम

डॉ. बिंदेश्वर पाठक उस समय सुलभ शौचालय की अवधारणा लेकर आए, जब अगड़ी जातियों के लिए बिहार में या यहां तक कि देश में भी इस क्षेत्र में आना दुश्वारियां भरा होता था। पाठक ने सुलभ शौचालय के जरिए खुले में शौच को खत्म करने की मुहिम शुरू की। सुलभ शौचालय की मैला टंकियों में जमा हुए मल से ऊर्जा उत्पादन शुरू करने के बाद वे दुनिया भर में सुर्खियों में आए थे। 11 अगस्त की शाम को पटना के कालिदास रंगालय में पुस्तक विमोचन कार्यक्रम में बिंदेश्वर पाठक आए थे। पटना के गांधी मैदान स्थित कालिदास रंगालय में शुक्रवार को डॉ. बिंदेश्वर पाठक सुविख्यात लोक कलाकार भिखारी ठाकुर के व्यक्तित्व एवं कृतित्व पर आधारित पुस्तक ‘पिया गइले कलकतवा’ के लोकार्पण समारोह में शामिल हुए थे। बिहार में यह उनका अंतिम कार्यक्रम साबित हुआ। यहां डॉ. पाठक ने कहा- “भिखारी ठाकुर ने भोजपुरी लोक कला और साहित्य को एक नई दिशा प्रदान की। वह जनमानस के कलाकार थे। उनके कार्य से प्रभावित होकर ही राहुल सांस्कृत्यायन ने उन्हें भोजपुरी का शेक्सपियर कहा था। किरणकांत वर्मा ने उनपर इस तरह की किताब लिखकर सराहनीय काम किया है। आने वाली पीढ़ी यह किताब पढ़ कर भोजपुरी लोक कला पर भिखारी ठाकुर के कार्यों को सही मायने में समझ सकेगी। उन्हें अपनी लोक-संस्कृति और लोक भाषा को जानने में सहूलियत होगी और वह अपनी विरासत पर गर्व कर सकेंगे।”

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