Bihar News : मिश्रा को किसने मारा? घर वाले जहां फोटो लेकर बार-बार घूम रहे थे, वहीं लावारिस अंतिम क्रिया

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Drug robbery in Hyderabad-Patna train, Motihari Youth died due to negligence of Bihar Police and PMCH hospital

जरा सोचिये इस मौत का गुनाहगार कौन
– फोटो : अमर उजाला

विस्तार


दर्द की इस दास्तान को पढ़ने से पहले यह जान लें कि इसे मौत बताया जा रहा है, लेकिन है यह हत्या। परिवार का संघर्ष इतनी ही दूर गया कि जबतक परिजन उसके पास पहुंचते, उसकी लाश भी  लावारिस कहते हुए जला दी गई। मोतिहारी के दक्षिण भवानीपुर निवासी 28 साल के उज्जवल मिश्रा उर्फ सौरभ कुमार को कार्यस्थल के मित्र ‘मिश्रा’ कहते थे। अब इस शादीशुदा युवक के परिजन उसकी लाश के बगैर उसका अंतिम संस्कार कर रहे हैं। जन्मदाता से लेकर जीवनसंगिनी तक रो रही। डेढ़ साल के बेटे को तो इंतजार ही रह जाएगा। इस हत्या के जिम्मेदार की पहचान पाठकों पर छोड़ते हुए ‘अमर उजाला’ मृतक के चचेरे भाई सोनू मिश्रा की जुबानी पूरी कहानी सामने ला रहा है।

ट्रेन से स्टेशन तक क्या हुआ, यह जानें

20 जुलाई को उज्ज्वल मिश्रा हैदराबाद से पटना निकले। 21 जुलाई को सामान्य तरीके से मोबाइल पर बात हुई। 22 को लड़खड़ाते हुए कॉल आया कि “बिहटा में खड़े हैं।” परिजन पक्का नहीं, लेकिन अंदाज लगा रहे कि ट्रेन में नशाखुरानी का शिकार होने के बाद यह कॉल आया था। पटना जीरो माइल से मोतिहारी के लिए बस पकड़ने के लिए घर वालों ने कहा। कुछ देर बाद मोबाइल बंद हो गया। (गायब होने के बाद मोबाइल लोकेशन बिहटा दिखा और फिर खगौल मयूर विहार देवी स्थान के बाद मोबाइल ऑफ हो गया।)

बिहार पुलिस की तत्परता- अध्याय 1

अनहोनी की आशंका देख परिजनों ने अपने स्थानीय संग्रामपुर थाने में सनहा दिया और घर के कई लोग पटना में जहां-तहां खुद ढूंढ़ने में लग गए। फोटो दिखाकर बिहटा, खगौल से लेकर पटना तक खोजबीन शुरू कर दी। शनिवार 22 जुलाई से गायब हुए उज्ज्वल के बारे में गुरुवार 27 जुलाई को बिहार पुलिस के 112 नंबर से कॉल आया। 27 जुलाई को आए कॉल में बताया गया कि टीम 112 ने 22 जुलाई को महेंद्रू के पास उज्ज्वल को बरामद किया था। तीन-चार लोग पीट रहे थे तो टीम ने छुड़ाकर पीरबहोर थाने को सुपुर्द कर दिया। जब टीम 112 ने पटना के अशोक राजपथ पर पीरबहोर थाना के सुपुर्द किया था, उस समय उज्ज्वल के पास उनका मोबाइल और आधार कार्ड भी था। पीरबहोर पुलिस ने उज्ज्वल मिश्रा को पीएमसीएच में भर्ती करवा दिया। 22 को बरामद शख्स के बारे में 27 जुलाई को सूचना दी गई। अगर परिजनों का यह कहना सही है तो यह कितना बड़ा अपराध है?

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