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सीएम नीतीश कुमार के पास चश्मे में अरविंद (स्वस्थ अवस्था में) और लालू प्रसाद के पास नागेंद्र राय।
– फोटो : अमर उजाला डिजिटल
विस्तार
महागठबंधन के अंदर परिस्थितियां ही आर-पार वाली होती जा रही हैं। यह एक नई परिस्थिति राजनीतिक नहीं होकर भी घोर राजनीतिक है। बिहार की नीतीश कुमार सरकार के एक अधिकारी को राजधानी पटना में इस तरह गाड़ी से उतार कर पीटा गया कि आंख बर्बाद हो गई। सिर में गंभीर चोट है। पटना में केस नहीं संभला तो दिल्ली एम्स रेफर किया गया। केस राजनीतिक इसलिए हो गया कि इस जानलेवा पिटाई के आरोपी राष्ट्रीय जनता दल के राष्ट्रीय अध्यक्ष लालू प्रसाद यादव के रिश्तेदार हैं। घटना के 48 घंटे बीतने वाले हैं, लेकिन दोनों आरोपी पुलिस की पहुंच से दूर हैं। दोनों नामजद आरोपियों का चचेरा भाई गिरफ्तार भी हुआ तो उसने भी उलटा केस कर दिया। राज्य के उप मुख्यमंत्री तेजस्वी यादव ने किसी को नहीं फंसाने, न किसी को बचाने का दावा किया; जबकि हकीकत फिलहाल सामने है।
अब तक बिहार सरकार की मदद नहीं
गया में डोभी के कार्यपालक पदाधिकारी अरविंद कुमार सिंह को मंगलवार 16 जनवरी की रात साढ़े नौ बजे के करीब तब पीटा गया था, जब वह पटना के गोला रोड में किसी मित्र से मिलने जा रहे थे। अरविंद कुमार सिंह के चचेरे भाई विजय कुमार सिंह की ओर से रूपसपुर थाने में दर्ज कराई गई प्राथमिकी में बताया है कि नशे में धुत 15-20 लोगों ने गाड़ी रुकवाई और फिर नुकीले हथियार से हमला कर दिया। मामला बुधवार रात तब मीडिया में आया, जब अरविंद सिंह को पटना के एक बड़े निजी अस्पताल ने हालत की गंभीरता देखते हुए दिल्ली रेफर कर दिया। राजधानी एक्सप्रेस से अरविंद के दिल्ली निकले हुए भी 24 घंटे गुजर चुके हैं, लेकिन अबतक बिहार सरकार की ओर से कोई मदद नहीं पहुंची है। गया में डोभी नगर पंचायत के मुख्य पार्षद मथुरा यादव ने सरकार से अपील की। बाकी, भाजपा ने इसे मुद्दा बनाया और तेजस्वी ने जवाब दिया कि इस केस की जानकारी के बाद उन्होंने एसपी से बात की है और आरोपियों पर सख्त कार्रवाई के लिए कहा है।
बयान खूब आए, बेड नहीं मिला अबतक
भाजपा ने इसे मुद्दा बनाया। केंद्रीय गृह राज्यमंत्री नित्यानंद राय, भाजपा प्रदेश अध्यक्ष सम्राट चौधरी आदि ने जंगलराज बताते हुए बयान खूब दिए, लेकिन अरविंद तक किसी तरह की मदद कहीं से नहीं पहुंची। ‘अमर उजाला’ ने उनके परिजनों से ताजा स्थिति की जानकारी ली। एम्स के जय प्रकाश नारायण ट्रॉमा सेंटर में गुरुवार को दो बार उनका सीटी स्कैन हो चुका है। ब्रेन में सूजन के कारण आंख का भी ऑपरेशन नहीं हो पा रहा है। डॉक्टरों के आंख बचने की संभावना शून्य कह दी है। परिजनों ने बताया कि अबतक सिर्फ पाटलिपुत्रा के सांसद रामकृपाल यादव का कॉल आया और उनके बेटे दिल्ली में अरविंद सिंह को देखने पहुंचे। एम्स में उन लोगों ने डॉक्टरों से मदद के लिए कहा भी है। हालांकि, अबतक बेड के बगैर बिहार सरकार के कार्यपालक पदाधिकारी स्ट्रेचर पर ही यहां-वहां टिकाए जा रहे हैं। अरविंद अविवाहित हैं। इनके पिता की मौत हो चुकी है। मां बुजुर्ग और बीमार हैं। वह दिल्ली नहीं जा सकी हैं। बाकी रिश्तेदार गंभीर हालत में उन्हें लेकर यहां-वहां जांच कराने जा रहे हैं।
नागेंद्र राय का केस हमेशा से संवेदनशील
लालू प्रसाद यादव के भतीजे नागेंद्र राय का मामला हमेशा बिहार के लिए संवेदनशील रहा है। पिछले साल जदयू से जुड़े एक बिल्डर को धमकी देकर दो करोड़ रंगदारी मांगने का मामला ताजा है। इससे पहले नागेंद्र राय उर्फ नागेंद्र यादव पर आईएएस सुभाष शर्मा को धमकाने समेत पांच-छह आपराधिक केस हैं। नागेंद्र राय संगीत का भी शौकीन है और लालू यादव की पार्टी राजद का नेता भी है। अब उसके बेटे जवान हो चुके हैं और इस बार शराब पीकर सरकारी अफसर पर जानलेवा हमले का केस दोनों बेटों तनुज यादव और नयन यादव पर है। हर सड़क पर सीसीटीवी कैमरा लगाकर कार के सीट बेल्ट और बाइक सवार के हेलमेट तक की जांच कर ऑनलाइन चालान भेजने वाली बिहार सरकार के किसी कैमरे में इन दो आरोपियों के भागने का सबूत नहीं मिला है। 48 घंटे बाद भी दोनों फरार हैं। और तो और, इन दोनों की गिरफ्तारी के लिए छापेमारी करने गई पुलिस ने नागेंद्र राय के भतीजे रंजन कुमार को गिरफ्तार किया। वह भी चोटिल था, हालांकि उसके पास मेडिकल का कोई प्रमाणपत्र नहीं था। पुलिस के पास उसकी गिरफ्तारी के साथ उसकी ओर से किया गया केस है, जिसमें वह बता रहा है कि दूसरे पक्ष ने उसे भी पीटा। कानूनी जानकारों के अनुसार नामजद आरोपियों की गिरफ्तारी की जगह अप्राथमिक अभियुक्त की गिरफ्तारी होना और उसकी ओर से काउंटर केस किए जाने का मतलब अब केस को समझौता में भेजने की तैयारी हो गई है।
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