[ad_1]

सूर्य मंदिर में पूजा के दौरान जस्टिस संजय करोल
– फोटो : अमर उजाला
विस्तार
सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस संजय करोल बुधवार को बिहार के नालंदा पहुंचे। जहां उन्होंने हिलसा और औंगारी सूर्य मंदिर में विधिवत पूजा अर्चना कर सुख-समृद्धि और मानव कल्याण की कामना की। हिलसा में मंदिर के पुजारी पंडित सौरभ प्रकाश ने वैदिक मंत्रोच्चार के साथ पूजा-अर्चना कराई। इस दौरान उन्होंने मंदिर के इतिहास के बारे में जानकारी ली। उन्होंने मंदिर की प्रशंसा करते हुए कहा कि पूरे बिहार में ही नहीं बल्कि देश का यह मंदिर अपने आप में अद्भुत और अलौकिक है।
चीफ जस्टिस के पूछने पर सूर्य मंदिर पुजारी सौरभ पांडेय ने बताया कि सूर्य मंदिर द्वापर कालीन है। कुष्ठ रोग निवारणार्थ, सूर्य महादशा और बुध के मृत्युकारक मारकेश में जो भी व्यक्ति सूर्य मंदिर में शोडषोपचार पूजन करता है तो उसके सभी अरिष्टों का नाश हो जाता है। उस व्यक्ति के जीवन में नव उर्जा का संचार हो जाता है। उसकी समस्त मनोकामना पूर्ण हो जाती है। उन्होंने कहा कि सूर्य मंदिर के गर्भगृह में सूर्य नारायण सूर्य पंचायतन के साथ विराजमान है। इनमें श्रीगणेश, गौरी, हनुमान, शिव और विष्णु देवता होते हैं। यही पंच देवता की पूजा से तैंतीस कोटि देवताओं की पूजा हो जाती है।

अधिवक्तागण के साथ बातचीत में न्यायाधीश ने इन्हीं विषयों को रखते हुए मंदिर की प्राचीनता और उसके महत्व को रेखांकित किया। उन्होंने बताया कि जब वे हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस थे। तब वे हिलसा पहली बार आए थे। तब उन्होंने तालाब और मंदिर के प्रथम दर्शन किए थे। सभी तीर्थ धाम का दर्शन किया, लेकिन यह अद्वितीय सूर्य मंदिर नवग्रह में ग्रहराज सूर्य भगवान पंचदेवता के साथ विराजमान हैं जो अत्यंत विशिष्ट है। मुझे भी यहां पूजा से शांति मिली और मनोकामना पूर्ण हुई। इससे पहले अधिवक्ता संघ और गणमान्य लोगों द्वारा उन्हें गुलदस्ता देकर स्वागत किया गया।
न्यायधीश संजय करोल का लक्ष्य है कि वह बिहार के सभी जिलों में जाकर पूजा-पाठ करें। अब तक वे 22 जिलों के मंदिरों में पूजा-पाठ कर चुके हैं। इस मौके पर मुख्य पार्षद धनंजय कुमार, नागेंद्र कुमार, अनिल कुमार, अमरेंद्र नाथ विश्वास और आर्यन आर्क आदि मौजूद रहे।
[ad_2]
Source link