Bijnor: नरभक्षी गुलदार ने बकरी को मारकर खाया, लेकिन पकड़ में अब तक न आया, एक दर्जन गांवों पर अगले 48 घंटे भारी

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गुलदार को पकड़ना वन विभाग के लिए चुनौती बन रहा है। वहीं बिजनौर के तकरीबन एक दर्जन गांवों के लिए अगले 48 घंटे बेहद भारी गुजरने वाले हैं। वन विभाग के अनुसार नरभक्षी गुलदार सिकंदरपुर गांव के जंगल में लौट आया है। वन विभाग ने विभाग द्वारा खुले में बकरी बांधी गई थी, जिसे रात गुलदार मारकर खा गया। आज टीम उसके पगचिन्हों का पीछा कर रही है। माना जा रहा है कि शीघ्र ही उसे मार या पकड़ लिया जाएगा। वहीं ऐसा नहीं होने पर इस क्षेत्र में अगले इंसानी शिकार की आशंका से लौट सहमे हुए हैं। 



बिजनौर शहर के पास दिखा गुलदार, थर्मल ड्रोन कैमरे में तस्वीर कैद

अब गुलदार का खौफ जिला मुख्यालय तक पहुंच गया है। थर्मल ड्रोन कैमरे में शहर के पास गुलदार की तस्वीर कैद हुई है। वहीं शहर तक गुलदार आने से लोग डरे हुए हैं। 

 


गुलदार अब तक 13 लोगों को मौत के घाट उतार चुके हैं जबकि 20 से ज्यादा लोगों को घायल भी कर चुके हैं। वन्य जीव विशेषज्ञ और जिम कार्बेट रिसर्च स्कॉलर जोएल लायेल कहते हैं कि आमतौर पर बाघ सामने से हमला कर देता है, लेकिन गुलदार के मामले में दूसरा पक्ष बहुत खतरनाक है।

गुलदार पेड़ पर चढ़ने में माहिर होता है और यह छिपने के लिए किसी पेड़ पर चढ़कर बैठ सकता है। इसके अलावा यह घास और खेत में इतना शातिरता से छिपकर बैठ सकता है कि पड़ोस से निकलने वालों को इसकी भनक तक न लगे। इसलिए इसे छलिया भी कहा जाता है।


20 दिन में नगीना और रेहड़ क्षेत्र में नरभक्षी गुलदार चार लोगों की जान ले चुका है। अब खुद वन विभाग ने भी दो गुलदार के नरभक्षी होने की बात स्वीकार ली है। ऐसे में वन्य जीव विशेषज्ञों की माने तो अगले 48 घंटे घटनास्थल के आसपास पांच से दस किलोमीटर की दायरे में आने वाले गांवों के लोगों के लिए भारी है। यदि समय रहते नरभक्षी को मारा या पकड़ा नहीं गया तो वह इन क्षेत्रों में कहीं पर भी अगला इंसानी शिकार कर सकता है।

 


17 जुलाई को अकबराबाद में महिला को नरभक्षी गुलदार ने मार डाला था। इसके बाद यह सिलसिला आगे बढ़ गया और फिर 27 जुलाई को तेलीपुरा, 30 जुलाई को रेहड़ के पास और फिर दो अगस्त को कोतवाली देहात के पास सिंकदरपुर गांव में एक वृद्ध को गुलदार ने मार डाला। सिकंदरपुर में जिस तरह वृद्ध को गुलदार ने खाया, उससे उसकी उम्र आठ से दस साल के बीच होने की अनुमान भी वन विशेषज्ञ लगा रहे हैं।


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