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सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव
– फोटो : amar ujala
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यूं तो बिजनौर जिले में सपा को तीन सीट मिली हैं, लेकिन चांदपुर में सबसे बुरी हार का सामना भी करना पड़ा। दरअसल, कांग्रेस के पक्ष में मुस्लिमों का ध्रुवीकरण हो जाने की वजह से सपा का चांदपुर से सूपड़ा ही साफ हो गया। समाजवादी पार्टी के उम्मीदवार को महज 494 वोट ही मिल सके जबकि बसपा भी इससे आगे निकल गई।
चांदपुर विधानसभा सीट से सपा के विधायक भी हैं। मौजूदा विधायक होने के बाद भी चांदपुर नगर पालिका सीट पर सपा का प्रदर्शन पूरे जिले में सबसे निराशाजनक रहा। बता दें कि बार अध्यक्ष पद के लिए सपा की ओर से नाजिम खान को टिकट दिया गया था। अब निकाय चुनाव के नतीजे सामने आए तो नाजिम खान को केवल 494 वोट ही मिल सके। यह हाल तब हुआ जब चांदपुर में सपा पदाधिकारियों के परिवारों के ही काफी वोट होंगे। जनता ही नहीं बल्कि परंपरागत वोट ने भी इस बार चांदपुर में सपा को नकार दिया है। इस बार चांदपुर से कांग्रेेस जिलाध्यक्ष की पत्नी जीनत परवीन ने जीत हासिल की है।
कांग्रेस की जीनत परवीन को 21534 मत मिले हैं जबकि भाजपा के विकास कुमार गुप्ता 11655 मत लेकर दूसरे नंबर पर रहे। उधर बसपा के नफीस को 1942 मत मिले और रालोद के मोहम्मद अरशद को 5499 मत हासिल हुए। बता दें कि पिछले चुनाव में सपा के टिकट पर फहमीदा बेगम चेयरपर्सन चुनीं गई थी।
इस बार सपा ने उनका टिकट काटकर नाजिम खान पर भरोसा जताया था लेकिन जनता ने सिरे से नकार दिया। पूरे जिले में सपा की सबसे बुरी हार चांदपुर में ही हुई है। टिकट काटे जाने की वजह से ही फहमीदा बेगम के बेटे मोहम्मद अरशद ने रालोद के टिकट पर चुनाव लड़ लिया। बताया जा रहा है कि मुस्लिम वोटर इस बार कांग्रेस के पक्ष में हो गए थे। जिसके चलते कांग्रेस को रिकाॅर्ड तोड़ जीत दिला दी।
पूर्व विधायक की पत्नी नहीं बचा सकी जमानत
नूरपुर से विधायक रहे नईमुल हसन की पत्नी तरन्नुम मलिक स्योहारा पालिका में अध्यक्ष पद के लिए सपा के टिकट पर चुनाव लड़ी। जिन्हें सिर्फ 4467 वोट ही मिले। पूर्व विधायक की पत्नी की इस निकाय चुनाव में जमानत जब्त हो गई। बता दें कि इसी विधानसभा चुनाव में नईमुल हसन ने धामपुर सीट से किस्मत आजमाई थी लेकिन उन्हें हार का सामना करना पड़ा था।
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