BJP: नीतीश के इस खासमखास को उसके घर में घेरने जा रहे अमित शाह, लेकिन भाजपा के लिए आसान नहीं पटखनी देना

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भाजपा के दिग्गज नेता अमित शाह 29 जून को मुंगेर के लखीसराय में बड़ी जनसभा करने जा रहे हैं। विपक्षी दलों की बैठक के एक सप्ताह के अंदर हो रही अमित शाह की इस सभा को भाजपा की ओर से शक्ति प्रदर्शन के तौर पर देखा जा रहा है। चूंकि, मुंगेर जनता दल यूनाइटेड के अध्यक्ष ललन सिंह का गृह क्षेत्र है और उन्हें नीतीश कुमार के दाहिने हाथ के तौर पर देखा जाता है, भाजपा उन्हें उनके ही घर में घेरने की तैयारी कर रही है। हालांकि, भूमिहार जाति के इस दिग्गज नेता की अपने क्षेत्र पर मजबूत पकड़ के कारण उन्हें उनके घर में ही चुनौती देना आसान नहीं है।

दरअसल, विपक्षी दलों की एकता से भाजपा को राष्ट्रीय स्तर पर कितना नुकसान होगा, यह अभी से नहीं कहा जा सकता, लेकिन इस एकता से बिहार में भाजपा को तगड़ा झटका लगने का अनुमान लगाया जा रहा है। जातीय राजनीति की प्रमुखता वाले राज्य बिहार में फिलहाल जातीय गणित विपक्ष या महागठबंधन के पक्ष में दिख रहा है। बेहतर जातीय समीकरण बनाकर ही 2019 के लोकसभा चुनाव में भाजपा ने नीतीश कुमार और रामविलास पासवान की पार्टियों के साथ चुनाव लड़ा और बिहार की 40 में से 39 सीटों पर जीत हासिल की थी।

लेकिन इस बार बदले समीकरणों में भाजपा को हर लोकसभा क्षेत्र में विपक्ष से कड़ी चुनौती मिलने का अनुमान है। तीसरी बार सत्ता में पहुंचने का सपना पाले बैठी भाजपा के लिए यह नुकसान बड़ा हो सकता है, लिहाजा पार्टी हर लोकसभा क्षेत्र के स्तर पर तैयारी कर अपना सियासी नुकसान कम करने की तैयारी कर रही है। इसी कड़ी में ललन सिंह को उनके घर में पटखनी देने की योजना बनाई जा रही है।

भूमिहार वोटों पर दांव

राजनीतिक विश्लेषक धीरेंद्र कुमार ने अमर उजाला को बताया कि मुंगेर भूमिहार बहुल इलाका है। जदयू अध्यक्ष राजीव रंजन सिंह उर्फ ललन सिंह इस समय यहां से सांसद हैं। भूमिहार वोटों पर पकड़ के कारण वे यहां के बेताज बादशाह के तौर पर देखे जाते हैं। भूमिहारों को पारंपरिक तौर पर भाजपा का मतदाता माना जाता है। ललन सिंह ने भी जब मुंगेर की लोकसभा सीट पर 2009 और 2019 में जीत हासिल की थी, तब वे एनडीए खेमे में ही थे।

लेकिन नीतीश कुमार के पाला बदलने के कारण अब अनुमान लगाया जा रहा है कि ललन सिंह के कारण भूमिहार मतदाताओं का एक बड़ा खेमा विपक्षी गठबंधन के पास जा सकता है। भाजपा के लिए यह बड़ा नुकसान हो सकता है, लिहाजा इस नुकसान को रोकने की पूरी कोशिश की जा रही है।

तेजस्वी यादव भी लंबे समय से इस वोट बैंक को अपने साथ जोड़ने की कोशिश कर रहे थे। लेकिन लालू यादव के शासनकाल में बिहार में हुई जातिगत खूनी राजनीति के कारण भूमिहार मतदाता राजद से अब तक दूर ही रहा था। नीतीश के पाला बदलने से अब ललन सिंह के कारण भूमिहार मतदाता अब विपक्षी दलों के साथ आ सकता है।  

कैसे ललन सिंह को हराएंगे

धीरेंद्र कुमार ने कहा कि मुंगेर में ललन सिंह को कैसे हराएंगे, भाजपा लगातार इस पर मंथन कर रही है। बिहार भाजपा नेता विजय सिन्हा सदन में नेता प्रतिपक्ष हैं और लखीसराय से आते हैं। लेकिन विजय सिन्हा का राजनीतिक कद ललन सिंह को चुनौती देने लायक नहीं माना जाता है। यही कारण है कि भाजपा ललन सिंह को मात देने के लिए दूसरे विकल्पों पर विचार कर रही है।

चर्चा है कि भाजपा नवादा से लोजपा (पशुपति पारस खेमे से) सांसद चंदन सिंह को मुंगेर में ललन सिंह के सामने मैदान में उतार सकती है। भूमिहार जाति से आने वाले चंदन सिंह बाहुबली नेता सूरजभान सिंह के भाई हैं और अपने क्षेत्र के अलावा भूमिहार जाति में अच्छी पकड़ रखते हैं। वे एनडीए खेमे से ललन सिंह के सामने मजबूत उम्मीदवार हो सकते हैं।  

बड़ी जीत हासिल होगी, नीतीश की राजनीति समाप्त- सम्राट चौधरी

बिहार भाजपा अध्यक्ष सम्राट चौधरी ने अमर उजाला से कहा कि पूरे राज्य की जनता देख रही है कि विपक्षी दलों की एकता भ्रष्टाचार में लिप्त नेताओं के द्वारा एक दूसरे को बचाने की कोशिश है। जनता को यह भी पता है कि नीतीश कुमार ने अपने 15 साल के शासन में बिहार को क्या दिया है। आज भी बिहार का युवा दूसरे राज्यों में जाकर नौकरी करने के लिए मजबूर है।

यही कारण है कि अब यह सभी मानते हैं कि नीतीश कुमार के पास बिहार को देने के लिए कुछ नहीं है, लिहाजा वे विपक्षी एकता का नाटक कर अपनी राजनीतिक जमीन बचाने की कोशिश कर रहे हैं। लेकिन उन्हें समझ आ जाना चाहिए कि बिहार में उनकी राजनीति का युग समाप्त हो गया है।

उन्होंने दावा किया कि लखीसराय की जनसभा में एक लाख लोगों के जुटने का अनुमान है। यह पार्टी स्तर का कार्यक्रम है और केंद्र सरकार में भाजपा के नौ साल होने के अवसर पर पार्टी द्वारा इसके जरिये लोगों से जुड़ने की कोशिश की जा रही है।

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