Chaiti Chhath Puja 2023 Arghya Timing, Sunset Time Live: आज डूबते सूर्य को इस समय दिया जाएगा अर्घ्य, देखें समय

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छठ के दिन पूजा में इन सामग्रियों का होता है प्रयोग

छठ के दिन पूजा में कई सामग्रियों का प्रयोग किया जाता है. इस पूजा के प्रसाद में प्राकृतिक वस्तुओं, मौसमी फलों और सभी प्रकार के फल-फूलों का प्रयोग होता है. यह पर्व प्रकृति के करीब ले जाता है.

पटना में  27 मार्च 2023 को सूर्यास्त का समय

सोमवार, 27 मार्च 2023

सूर्यास्त: 18:03

 रांची में  27 मार्च 2023 को सूर्यास्त का समय 

सोमवार, 27 मार्च 2023

सूर्यास्त: 18:02

नवादा में   27 मार्च 2023 को सूर्यास्त का समय

सोमवार, 27 मार्च 2023

सूर्यास्त: 18:02

गढ़वा में 27 मार्च 2023 को सूर्यास्त का समय 

सोमवार, 27 मार्च 2023

सूर्यास्त: 16:09

छठ पूजा के प्रसाद का महत्व

छठ पूजा में वैसे तो कई तरह के प्रसाद चढ़ाए जाते हैं. लेकिन उसमें सबसे अहम ठेकुए का प्रसाद होता है, जिसे गुड़ और आटे से बनाया जाता है. छठ की पूजा इसके बिना अधूरी मानी जाती है. छठ के सूप में इसे शामिल करने के पीछे वैज्ञानिक तर्क यह है कि छठ के साथ सर्दी की शुरुआत हो जाती है और ऐसे में ठंड से बचने और सेहत को ठीक रखने के लिए गुड़ बेहद फायदेमंद होता है.

उगते सूर्य को अर्घ्य देने का जानें महत्व

छठ पूजा का अंतिम और आखिरी दिन ऊषा अर्घ्य होता है. इस दिन उगते सूर्य को अर्घ्य दिया जाता है. जिसके बाद छठ के व्रत का पारण किया जाता है. इस दिन व्रती महिलाएं सूर्योदय से पहले नदी के घाट पर पहुंचकर उदितनारायण सूर्य को अर्घ्य देती हैं और सूर्य भगवान और छठी मैया से संतान की रक्षा और परिवार की सुख-शांति की कामना करती हैं. इस पूजा के बाद व्रती कच्चे दूध, जल और प्रसाद से व्रत का पारण करती हैं.

ऊषा अर्घ्य के दिन इन बातों का रखें ध्यान 

1. सूर्य देव को अर्घ्य देते समय अपना चेहरा पूर्व दिशा की ओर ही रखें

2. सूर्य देव को अर्घ्य देने के लिए हमेशा तांबे के लोटे का प्रयोग करें.

3. सूर्य देव को अर्घ्य देते समय जल के पात्र को हमेशा दोनों हाथों से पकड़े.

4. सूर्य को अर्घ्य देते समय पानी की धार पर पड़ रही किरणों को देखना शुभ माना जाता है.

5. अर्घ्य देते समय पात्र में अक्षत और लाल रंग का फूल जरूर डालें.

अर्घ्य देते समय पढ़ें सूर्य मंत्र (Chhath Puja Surya Arghya mantra)-

ऊँ ऐही सूर्यदेव सहस्त्रांशो तेजो राशि जगत्पते।

अनुकम्पय मां भक्त्या गृहणार्ध्य दिवाकर:।।

ऊँ सूर्याय नम:, ऊँ आदित्याय नम:, ऊँ नमो भास्कराय नम:। अर्घ्य समर्पयामि।।

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