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बिहार शिक्षा विभाग
– फोटो : अमर उजाला
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कल ही नहाय खाय है। परसों खरना और फिर अगले दिन शाम वाला अर्घ्य। जब अर्घ्य देने का समय होगा, उस समय दूसरे जिले में रहने का सरकारी ऑर्डर है। जो छठ में अर्घ्य देती हैं, वह तो यहां-वहां कहीं भी कर लेंगी। लेकिन, जो व्रती हैं? क्या करें? लिखन तो दूर, मुंह खोलने की जानकारी भर मिलने पर सरकार नौकरी से बर्खास्त कर देगी। अध्यापक संघ बनाने वाली महिला शिक्षिका को चयन-मुक्त कर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के चहेते भारतीय प्रशासनिक सेवा के अधिकारी और शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव केके पाठक ने अपना रूप दिखा दिया है। सो, डर सभी को है। एक तरफ छठी मइया का व्रत टूटने का और दूसरी तरफ नौकरी छूटने का। चार व्रती महिलाओं और एक पुरुष ने इस संकट से ‘अमर उजाला’ को रू-ब-रू कराया, इस शर्त के साथ कि नाम नहीं छापें। यह भी कहा कि छठ से रोकने वाली सरकार खुद आज नहीं तो कल इसका खामियाजा भुगतेगी, लेकिन फिलहाल घर में छठ के पहले द्वंद्व है। महाभारत है।
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