Chitragupta Jayanti 2022, Kalam Davat Puja: कल होगी चित्रगुप्त और कलम दवात की पूजा, जानें शुभ मुहूर्त

[ad_1]

Chitragupta Puja 2022, Kalam Davat Puja: कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि के दिन चित्रगुप्त पूजा होती है. भाईदूज के दिन श्री चित्रगुप्त जयंती मनाते हैं. इस दिन पर कलम-दवात पूजा (कलम, स्याही और तलवार पूजा) करते हैं जिसमें पेन, कागज और पुस्तकों की पूजा होती है. भगवान चित्रगुप्त की पूजा 27 अक्टूबर को है.

भगवान चित्रगुप्त पूजा 2022 मुहूर्त

कार्तिक शुक्ल द्वितीया तिथि प्रारम्भ: 26 अक्तूबर 2022, दोपहर 02:42 से
कार्तिक शुक्ल द्वितीया तिथि समाप्त: 27 अक्तूबर 2022, दोपहर 12:45 तक
पूजा मुहूर्त: दोपहर 01:18 से दोपहर 03:33 तक

कौन हैं चित्रगुप्त ?

धर्म ग्रंथों के अनुसार चित्रगुप्त ब्रह्मा जी के मानस पुत्र हैं. कहते हैं किसी भी प्राणी के पृथ्वी पर जन्म से लेकर मृत्यु तक उसके कर्मों को अपने पुस्तक में लिखते रहते हैं, उनकी लेखनी के आधार पर ही व्यक्ति को स्वर्ग और नर्क की प्राप्ति होती है. चित्रगुप्त कायस्थ समाज के ईष्ट देवता माने जाते हैं.

चित्रगुप्त पूजा विधि

भाई दूज के दिन शुभ मुहूर्त में एक चौकी पर चित्रगुप्त महाराज की तस्वीर स्थापित करें. उनको अक्षत्, फूल, मिठाई, फल आदि चढ़ा दें. अब एक नई कलम उनको अर्पित करें तथा कलम-दवात की पूजा करें. अब सफेद कागज पर श्री गणेशाय नम: और 11 बार ओम चित्रगुप्ताय नमः लिख लें. अब चित्रगुप्त जी से विद्या, बुद्धि तथा लेखन का अशीर्वाद लें.

चित्रगुप्त व्रत कथा

सौदास नाम का एक राजा था. वह एक अन्यायी और अत्याचारी राजा था और उसके नाम पर कोई अच्छा काम नहीं था। एक दिन जब वह अपने राज्य में भटक रहा था तो उसका सामना एक ऐसे ब्राह्मण से हुआ जो पूजा कर रहा था. उनकी जिज्ञासा जगी और उन्होंने पूछा कि वह किसकी पूजा कर रहे हैं. ब्राह्मण ने उत्तर दिया कि आज कार्तिक शुक्ल पक्ष का दूसरा दिन है और इसलिए मैं यमराज (मृत्यु और धर्म के देवता) और चित्रगुप्त (उनके मुनीम) की पूजा कर रहा हूं, उनकी पूजा नरक से मुक्ति प्रदान करने वाली है और आपके बुरे पापों को कम करती है. यह सुनकर सौदास ने भी अनुष्ठानों का पालन किया और पूजा की.

बाद में जब उनकी मृत्यु हुई तो उन्हें यमराज के पास ले जाया गया और उनके कर्मों की चित्रगुप्त ने जांच की. उन्होंने यमराज को सूचित किया कि यद्यपि राजा पापी है लेकिन उसने पूरी श्रद्धा और अनुष्ठान के साथ यम का पूजन किया है और इसलिए उसे नरक नहीं भेजा जा सकता.इस प्रकार राजा केवल एक दिन के लिए यह पूजा करने से, वह अपने सभी पापों से मुक्त हो गया.

चित्रगुप्त मंत्र:

इस दिन ओम श्री चित्रगुप्ताय नमः मंत्र का भी जाप करना उत्तम माना जाता है.

श्री चित्रगुप्तजी के 12 पुत्रों का विवाह नागराज वासुकि की 12 कन्याओं से हुआ जिससे कि कायस्थों की ननिहाल नागवंशी मानी जाती है. माता नंदिनी के 4 पुत्र कश्मीर में जाकर बसे तथा ऐरावती एवं शोभावती के 8 पुत्र गौड़ देश के आसपास बिहार, ओडिशा तथा बंगाल में जा बसे. बंगाल उस समय गौड़ देश कहलाता था.

[ad_2]

Source link

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *