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क्लोनल रूट स्टॉक तैयार।
– फोटो : संवाद
विस्तार
हिमाचल प्रदेश की नौणी विवि इस बार बागवानों को क्लोनल रूट स्टॉक पर तैयार किए सेब के पौधे भी उपलब्ध करवाएगा। विवि की ओर से किया गया ट्रायल सफल रहा है। पिछले वर्ष विवि की ओर से दो हजार पौधों का वितरण किया गया था, जबकि इस बार 20 हजार पौधे 11 दिसंबर से पहले आओ पहले पाओ के आधार पर बागवानों को बिक्री किए जाएंगे। जबकि विवि की ओर कुल 2.72 लाख से अधिक विभिन्न फलदार पौधे प्रदान किए जाएंगे।
जानकारी के अनुसार नौणी विवि की ओर से क्लोनल रूट स्टॉक पर पिछले कई वर्षो से कार्य किया जा रहा था, जो सफल रहा है। विवि के विशेषज्ञों का दावा है कि यह पौधा करीब 12 फीट ऊंचा होगा और चौड़ाई तीन से चार फुट होगी। एक पौधा औसत 12 से 15 किलो फल देगा। इसके अलावा इस पौधे की आयु भी 25 से 30 वर्ष तक होगी। यह पौधा रोपाई के चार से पांच वर्ष बाद वातावरण और रखरखाव के अनुसार फल देना शुरू कर देगा।
उधर, नौणी विवि के फल विज्ञान विभाग के विभागध्यक्ष डॉ. डीपी शर्मा ने बताया कि बागवान अपने क्षेत्र की जलवायु के आधार पर पौधों की रोपाई कर सकते है। विशेषज्ञों की राय भी ले सकते है। क्लोनल रूट स्टॉक के पौधे नौणी विवि की विभिन्न शाखाओं पर उपलब्ध किए जा रहे हैं। इसके अलावा इस बिक्री के दौरान किसानों को सेब, कीवी, अनार, खुमानी, आड़ू, नेक्टरीन, चेरी, अखरोट, नाशपाती, प्लम आदि की विभिन्न किस्में उपलब्ध करवाई जाएंगी। सीडिलंग्स के साथ सेब के क्लोनल रूट स्टॉक के पौधे भी उपलब्ध हैं।
यहां से भी ले सकेंगे पौधेलाहौल-स्पीति और पांगी के किसानों की सुविधा के लिए बजौरा में क्षेत्रीय बागवानी अनुसंधान और प्रशिक्षण केंद्र में पौधों की बिक्री दो दिसंबर से शुरू हो चुकी है। राज्य के विभिन्न हिस्सों में स्थित विश्वविद्यालय के विभिन्न कृषि विज्ञान केंद्र (केवीके) और अनुसंधान केंद्र भी 11 दिसंबर से पौधों की बिक्री करेंगे। इनमें कंडाघाट (सोलन), शरबो (किन्नौर), रोहड़ू (शिमला), चंबा, ताबो (लाहौल और स्पीति) के केवीके, नेरी महाविद्यालय और मशोबरा में क्षेत्रीय बागवानी अनुसंधान और प्रशिक्षण केंद्र शामिल हैं।
क्या होता है क्लोनल रूट स्टॉक
सीडलिंग पर पौधा बीजों से तैयार होता है जबकि क्लोनल जड़ों से तैयार होता है।
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