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कोरोना (सांकेतिक)
– फोटो : istock
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भीड़भाड़ वाले स्थान कोविड के सुपर स्प्रेडर बन सकते हैं। ऐसे मामले उत्तर भारत में पहले भी सामने आ चुके हैं। दुनिया भर के सात संस्थानों के 15 वैज्ञानिकों की टीम को अल्फा वेरिएंट जनित कोविड-19 के मामलों में असामान्य वृद्धि मिली थी, जो अल्फा वेरिएंट के प्रसार से बिल्कुल अलग थी।
अध्ययन करने वाली टीम का नेतृत्व कर रहे बीएचयू के जंतु विज्ञान विभाग के प्रो. ज्ञानेश्वर चौबे ने बताया कि 3085 अल्फा वेरिएंट के जीनोमिक सीक्वेंस का विश्लेषण किया। इससे पता चला कि पंजाब में कोरोना का अचानक आया उछाल प्राकृतिक नहीं था। इसका फैलाव तकनीकी रूप से तेज था और नाममात्र के फाउंडर्स क्लस्टर से जुड़ा था।
पंजाब से प्राप्त जीनोमिक सीक्वेंस स्वतंत्र वंशावली के बजाय कुछ ही क्लस्टर्स से जुड़े थे। इस तरह के फाउंडर क्लस्टर आमतौर पर सुपरस्प्रेडर इवेंट्स, इनडोर मीटिंग्स या किसी बड़ी सभा के कारण देखने को मिलते हैं। संभवतः अधिक भीड़भाड़ वाले स्थानों या कार्यक्रमों से संक्रमण सामान्य से 5 से 10 गुना तेजी से बढ़ा।
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