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क्रिप्टो करेंसी ठगी।
– फोटो : संवाद
विस्तार
क्रिप्टोकरेंसी मामले में आरोपियों ने प्रोफेशनल तरीके से ठगी को अंजाम दिया। आरोपियों से पूछताछ में एक और बड़ा खुलासा हुआ है। मेरठ के रहने वाले एक आरोपी ने ठगी के लिए साॅफ्टवेयर तैयार किए। यह आरोपी प्रशिक्षण लेने के सिलसिले में कई बार दुबई गया है। इसे इंजीनियर बताया जा रहा है। लोगों को अपने जाल में फंसाने के लिए आरोपी ने विदेश में डिजिटल करेंसी का पूरा खेल समझा।
भारत लौटकर एक साॅफ्टवेयर तैयार किया। उसके बाद शातिर आरोपियों ने फर्जी वेबसाइट तैयार की, जिसमें निवेशकों को उनकी आईडी खोलने पर एक डिजिटल करेंसी में दिन-प्रतिदिन बढ़ोतरी दिखती थी। वास्तव में ऐसा नहीं था। दोगुना रिटर्न के लालच में लोगों के समक्ष डिजिटल करेंसी का ऐसा जाल बुना गया कि लोग इनके झांसे में आते गए। लोगों ने पैसा डबल करने के चक्कर में निवेश करना शुरू कर दिया।
पुलिस एसआईटी इस मामले में सभी पहलुओं की गंभीरता से जांच कर रही है। आरोपियों से पूछताछ के चलते एसआईटी जांच को आगे बढ़ा रही है। पुलिस एसआईटी का मानना है कि शातिर आरोपियों ने 4 से 5 सॉफ्टवेयर तैयार किए। इसके अलावा कई फर्जी वेबसाइट भी बनाई है। इससे संबंधित रिकॉर्ड जांच टीम पहले ही जुटा चुकी है।
मामले में और गिरफ्तारियां तय
क्रिप्टोकरेंसी ठगी मामले में कई और आरोपियों की गिरफ्तारियां तय हैं। डीजीपी संजय कुंडू ने बताया कि आरोपियों ने प्रोफेशनल तरीके से ठगी को अंजाम दिया है। आरोपियों को बख्शा नहीं जाएगा। लोगों को ठगने वालों की गिरफ्तारियां जारी हैं।
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