Dehradun: निजी स्कूलों की मनमानी नहीं रोक पाई सरकार,  लुट रहे अभिभावक, ड्राफ्ट से आगे नहीं बढ़ पाया फीस एक्ट

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Government could not stop the arbitrariness of private schools Fees Act Uttarakhand news in hindi

किताबें
– फोटो : istock

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प्रदेश में निजी स्कूलों की बढ़ती फीस, ड्रेस और महंगी किताबों की मनमानी सरकार नहीं रोक पाई है। इसके लिए पहले फीस एक्ट बनाने का दावा हुआ फिर राज्य विद्यालय मानक प्राधिकरण बनाने का शासनादेश हुआ, लेकिन इससे आगे बात नहीं बढ़ पाई है। यही वजह है कि हर साल की तरह इस साल भी लाखों अभिभावक पांच से दस हजार रुपये के किताब के सेट और स्कूल फीस के नाम पर सिस्टम की मार झेल रहे हैं।

प्रदेश के निजी स्कूलों की मनमानी फीस और निजी प्रकाशकों की महंगी किताबों पर रोक लगाई जा सके इसके लिए सरकार की ओर से फीस एक्ट बनाने का दावा किया गया था। पहले पूर्ववर्ती कांग्रेस और फिर भाजपा सरकार में इसके लिए समय-समय पर निर्देश जारी हुए। पूर्ववर्ती हरीश रावत सरकार में इसका ड्राफ्ट भी तैयार कर लिया गया था।

तत्कालीन शिक्षा सचिव एमसी जोशी की ओर से खासी मशक्कत के बाद फीस एक्ट का ड्राफ्ट बनकर तैयार हुआ, लेकिन इसका प्रस्ताव कैबिनेट में नहीं आ पाया। इसके बाद भाजपा की त्रिवेंद्र सरकार में नए सिरे से फीस एक्ट बनाने का दावा हुआ। इसमें देरी पर तत्कालीन शिक्षा मंत्री अरविंद पांडे ने कई बार नाराजगी जताई, लेकिन बात आगे नहीं बढ़ पाई। राज्य में राष्ट्रीय शिक्षा नीति के तहत बाद में राज्य विद्यालय मानक प्राधिकरण बनाने का शासनादेश हुआ।

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