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सीएम पुष्कर सिंह धामी
– फोटो : अमर उजाला
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राज्य सरकार ने जिला स्तरीय विकास प्राधिकरणों को दोबारा सक्रिय करते हुए हाईवे के 50 से 100 मीटर दायरे में नक्शे पास कराने का निर्णय तो ले लिया लेकिन सवाल ये है कि वहां नक्शे पास कौन करेगा। हालात ये हैं कि प्राधिकरणों में जितने पद स्वीकृत हैं, उनके सापेक्ष 70 प्रतिशत से अधिक पद खाली पड़े हैं।
पूर्ववर्ती त्रिवेंद्र सरकार ने जब 2017 में जिला स्तरीय विकास प्राधिकरणों का गठन किया था तो इसमें सबसे बड़ी परेशानी कम स्टाफ की सामने आई थी। नक्शा पास करने वाले इंजीनियर व आर्किटेक्ट की भरपाई हरिद्वार-रुड़की विकास प्राधिकरण और मसूरी-देहरादून विकास प्राधिकरण से कर्मचारी भेजकर की गई थी। इन कर्मचारियों पर काम का बोझ और जनता के बीच इनकी कार्यप्रणाली पर रोष के चलते ही सरकार को इन प्राधिकरणों को स्थगित करना पड़ा था।
सरकार ने अब नए सिरे से प्राधिकरणों को सक्रिय करने को नक्शे पास करने की अनिवार्यता तो कर दी है लेकिन सवाल ये है कि वहां नक्शे पास कौन करेगा। एमडीडीए, एचआरडीए को छोड़ दें तो बाकी जिलों के प्राधिकरणों में स्टाफ की भारी कमी है। न वहां अवैध निर्माण को देखने वाले हैं और न ही नक्शे को परखकर पास करने वाले। अब इस बात को लेकर चिंता जताई जा रही है कि जैसे ही शासनादेश होगा, वैसे ही प्राधिकरण काम शुरू तो कर देंगे लेकिन काम करने वाले कहां से आएंगे?
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