Delhi: केजरीवाल के आवास पर कथित हरित मानदंडों के उल्लंघन का मामला, एनजीटी ने मांगी चार सप्ताह में रिपोर्ट

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NGT seeks report from government panel in four weeks on alleged violation of green norms at Kejriwal residence

सीएम अरविंद केजरीवाल
– फोटो : अमर उजाला

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राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) ने दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के आधिकारिक आवास पर कुछ निर्माण में पर्यावरण मानदंडों के कथित उल्लंघन पर एक पैनल द्वारा अपनी रिपोर्ट नहीं सौंपने पर निराशा व्यक्त की है। तथ्यात्मक स्थिति का पता लगाने के लिए इस साल मई में गठित पैनल एनजीटी के निर्देशों का पालन करने में विफल रहा है। ऐसे में ट्रिब्यूनल ने उसे रिपोर्ट दाखिल करने के लिए चार सप्ताह का समय दिया और चेतावनी दी कि ऐसा करने में विफलता के कारण जुर्माना जारी किया जाएगा। साथ ही राज्य के मुख्य सचिव को पेश होने का समन जारी किया।

ट्रिब्यूनल के अनुसार मामले की जांच के लिए नौ मई को दिल्ली सरकार के मुख्य सचिव, प्रमुख सचिव (पर्यावरण एवं वन), दिल्ली शहरी कला आयोग (डीयूएसी) के एक नामित सदस्य और उत्तरी दिल्ली के जिला मजिस्ट्रेट की एक संयुक्त समिति का गठन किया गया था। एनजीटी एक याचिका पर विचार कर रही थी, जिसमें आरोप लगाया गया है कि 6-फ्लैग स्टाफ रोड (सीएम का निवास) और 45-के विकास के दौरान लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) द्वारा स्थायी और अर्ध-स्थायी निर्माण किए गए और 20 से अधिक पेड़ काटे गए।

मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल का आधिकारिक बंगला राजनीतिक तूफान के घेरे में है। सीएम के लिए नए आधिकारिक आवास के निर्माण में कथित अनियमितताओं और कदाचार की जांच के लिए सितंबर में सीबीआई ने प्रारंभिक जांच दर्ज की थी। भाजपा और कांग्रेस नेताओं ने आरोप लगाया है कि भव्य क्वार्टरों के नवीनीकरण और निर्माण पर 40 करोड़ रुपये से अधिक सार्वजनिक धन खर्च किया गया। वहीं, सत्तारूढ़ आम आदमी पार्टी ने किसी भी गलत काम के आरोपों को खारिज कर दिया है।

30 अक्तूबर को पारित एक आदेश में एनजीटी अध्यक्ष न्यायमूर्ति प्रकाश श्रीवास्तव की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि मई में ट्रिब्यूनल के निर्देश के बाद मामले को दो बार स्थगित किया गया है, लेकिन रिपोर्ट अभी भी प्रतीक्षित है। पीठ ने कहा कि ‘हम संयुक्त समिति को रिपोर्ट दाखिल करने के लिए चार सप्ताह का और समय देते हैं। ऐसा नहीं करने पर दिल्ली के मुख्य सचिव सुनवाई की अगली तारीख (15 जनवरी) पर व्यक्तिगत रूप से वर्चुअल माध्यम से उपस्थित होंगे।’

कार्यवाही के दौरान ट्रिब्यूनल ने उप वन संरक्षक (मध्य दिल्ली) द्वारा दायर एक रिपोर्ट पर गौर किया, जिसमें कहा गया था कि सीबीआई ने मामले में प्रारंभिक जांच शुरू कर दी है। यह भी नोट किया गया कि पीडब्ल्यूडी ने अनुमति और क्षतिपूर्ति वृक्षारोपण सहित आवश्यक दस्तावेज जमा करने के लिए दो सप्ताह का समय मांगा था। याचिका के अनुसार, डीयूएसी की मंजूरी के बिना और हरित क्षेत्र बढ़ाने के बारे में आयोग के अवलोकन का उल्लंघन करते हुए निर्माण अवैध रूप से किया गया था।

दिल्ली शहरी कला आयोग अधिनियम की धारा 12 कहती है कि संबंधित नगर निगम डीयूएसी से अनुमति प्राप्त किए बिना विकास प्रस्तावों को मंजूरी नहीं दे सकता है। याचिका में कहा गया है कि इस प्रकार हरित क्षेत्र को बढ़ाने के लिए डीयूएसी की टिप्पणियों को नजरअंदाज करते हुए अवैध रूप से निर्माण किया गया, जो दिल्ली नगर निगम अधिनियम 1957 का उल्लंघन है। जिसके लिए निर्माण के लिए वैध अनुमोदन की आवश्यकता होती है।

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