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मौलाना मदनी
– फोटो : अमर उजाला
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प्रमुख मुस्लिम संगठन जमीयत उलेमा-ए-हिंद ने शुक्रवार को इस्लामोफोबिया में कथित वृद्धि की बात कहते हुए अल्पसंख्यकों के खिलाफ हिंसा भड़काने वालों को विशेष रूप से दंडित करने के लिए एक अलग कानून बनाने की मांग की। जमीयत की 34वीं आम सभा यहां रामलीला मैदान में संगठन के प्रमुख मौलाना महमूद मदनी की अध्यक्षता में शुरू शुक्रवार को शुरू हुई।
आम सभा में संगठन ने देश में घृणा अभियान और इस्लामोफोबिया में कथित वृद्धि सहित कई प्रस्तावों को पारित किया। जमीयत ने आरोप लगाया कि मुस्लिम समुदाय के खिलाफ नफरत और उकसावे के मामलों के अलावा इस्लामोफोबिया में वृद्धि हाल के दिनों में हमारे देश में खतरनाक स्तर तक बढ़ गई है। जमीयत ने कहा कि सबसे खेदजनक बात यह है कि सरकार इस घटनाक्रम से वाकिफ है मगर उसने शुतुरमुर्ग जैसा दृष्टिकोण अपना रखा है।
मदनी ने कहा कि यह भूमि मुसलमानों की पहली मातृभूमि है। यह कहना कि इस्लाम एक ऐसा धर्म है जो बाहर से आया है, सरासर गलत और निराधार है। इस्लाम सभी धर्मों में सबसे पुराना है। हिंदी मुसलमानों के लिए भारत सबसे अच्छा देश है। भारत हमारा देश है। यह देश जितना नरेंद्र मोदी और मोहन भागवत का है, उतना ही महमूद का भी है। न तो महमूद उनसे एक इंच आगे है और न ही वे महमूद से एक इंच आगे।
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