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एम्स दिल्ली
मानव अंगों के परिवहन के लिए अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स), दिल्ली का ड्रोन उड़ान नहीं भर पाएगा। एम्स ने संजीवनी योजना के तहत मानव अंगों के परिवहन के लिए बीते वर्ष सितंबर में योजना बनाई थी।
योजना के तहत एम्स ट्रामा सेंटर, एम्स परिसर से मानव अंगों का परिवहन कर नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ कैंसर (एनआईसी), झज्जर सहित दिल्ली-एनसीआर के अस्पतालों में लाना और ले जाना था, लेकिन दिल्ली का क्षेत्र नो फ्लाई जोन होने के कारण इस योजना को मंजूरी नहीं मिल पा रही है। ऐसे में एम्स ने इस योजना को रद्द करने का फैसला किया है।
योजना रद्द होने के बाद एम्स परिसर में होने वाले अंगदान व प्रत्यारोपण के लिए अंगों का परिवहन ग्रीन कॉरिडोर बनाकर किया जाएगा। एम्स ट्रामा सेंटर सूत्रों के अनुसार परियोजना को मंजूरी न मिल पाने के कारण फिलहाल प्रोजेक्ट आगे नहीं बढ़ पाएगा। बता दें कि दुनिया के कुछ विकसित देशों में प्रत्यारोपण ऑपरेशन के लिए मानव अंगों का ड्रोन से परिवहन किया जाता है। भारत में इसके लिए सरकारी अधिकारियों से अनुमति लेनी पड़ती है।
दक्षिण भारत में शुरू हुई थी सुविधा
दक्षिण भारत में ड्रोन के माध्यम से अंगों का परिवहन की सुविधा शुरू हो चुकी है। पिछले वर्ष केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने चेन्नई में मानव अंगों के परिवहन के लिए भारतीय ड्रोन प्रौद्योगिकी के पहले प्रोटोटाइप का अनावरण था।
एम्स ट्रामा सेंटर में हर साल होतेहैं दस से अधिक अंगदान
एम्स ट्रामा सेंटर में हर साल औसतन 10 से अधिक अंगदान होते हैं। पिछले साल भी एम्स में 16 से अधिक लोगों ने अंगदान किया था। इसके अलावा एम्स में राष्ट्रीय अंग और ऊतक प्रत्यारोपण संगठन (एनओटीटीओ) से प्राप्त अंगों का प्रत्यारोपण होता है। एम्स अपने यहां होने वाले अंगदान व प्रत्यारोपण में सुधार व तेजी लाने के लिए ड्रोन सेवा को शुरू करना चाहता था।
ड्रोन से कम समय में हो सकता है परिवहन
सड़क मार्ग के मुकाबले ड्रोन के माध्यम से मानव अंगों का परिवहन वायु मार्ग से तेजी से हो सकता है। दिल्ली के अलावा अन्य राज्यों में ड्रोन की मदद से मेडिकल सामानों का परिवहन किया जा रहा है। अधिकारियों की माने तो ड्रोन की मदद से 100 से 160 की स्पीड से परिवहन किया जा सकेगा,जबकि सड़क से यह स्पीड संभव नहीं। सड़क वायु मार्ग के मुकाबले लंबा होता है।
वर्तमान में मानव अंगों को शहर की पुलिस की मदद से ग्रीन कॉरिडोर बनाकर एम्स से अन्य अस्पतालों में सड़क मार्ग से पहुंचाया जाता है। ऐसा करने से जनता को कुछ असुविधाओं का सामना करना पड़ता है।
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