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विनय कुमार सक्सेना
– फोटो : अमर उजाला
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राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) ने दिल्ली में यमुना की सफाई के लिए एक उच्च स्तरीय कमेटी गठित की है। इसके अध्यक्ष दिल्ली के उपराज्यपाल (एलजी) होंगे। पिछले 29 वर्षों से सुप्रीम कोर्ट और एनजी के आदेशों के पालन में दिल्ली सरकार की पूर्ण विफलता को देखते हुए आदेशों के पालन और निगरानी के लिए कमेटी गठित की गई है।
खंडपीठ ने कहा कि ऐसा प्रतीत होता है कि काफी हद तक यमुना की सफाई के मामले में सुप्रीम कोर्ट और एनजीटी के फैसलों की अनदेखी की गई। नियत समय सीमा में आदेशों को लागू नहीं किए गए। जमीनी हकीकत और यमुना की सफाई के लिए जवाबदेही को निभाने में दिल्ली सरकार का प्रदर्शन संतोषजनक नहीं रहा। यमुना की सफाई और प्रदूषण नियंत्रण के लिहाज से यह जरूरी प्रतीत होता है कि इसके लिए सर्वोच्च प्रशासनिक अधिकारियों की भागीदारी हो।
सभी पहलुओं पर मंथन के बाद एनजीटी ने संबंधित प्राधिकारों की उच्च स्तरीय समिति का गठन किया गया। यदिल्ली विकास प्राधिकरण (डीडीए) के अध्यक्ष और दिल्ली के प्रशासक होने के नाते उपराज्यपाल से उच्च स्तरीय समिति का नेतृत्व करने को कहा गया है।
करोड़ों खर्च के बाद भी प्रदूषकों का अनियंत्रित प्रवाह जारी सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट्स (एसटीपी) के लिए जारी आदेश के बावजूद नजफगढ़ और शाहदरा नालों में सीवरेज का अनियंत्रित प्रवाह जारी है। कई रिहायशी इलाकों में भी सीवरेज का काम अधूरा होने से यमुना में प्रदूषण का प्रदूषण स्तर दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और एनजीटी की वेबसाइट पर प्रदर्शित आंकड़े देखे जा सकते हैं। दिल्ली सरकार की तरफ से 1500 करोड़ रुपये खर्च करने के बाद भी आदेश का पालन नहीं किया गया।
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