Delhi : यमुना के बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में संचारी रोग बढ़ने की आशंका, यूनिसेफ चिंतित, कार्यशाला आयोजित

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Delhi : Fear of increase in communicable diseases in flood affected areas of Yamuna

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– फोटो : अमर उजाला

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यमुना में आई बाढ़ के बाद प्रभावित क्षेत्रों में संचारी रोग (वायरस या बैक्टीरिया से होने वाली बीमारी) का खतरा कई गुना तक बढ़ सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि प्रभावित क्षेत्रों में जिस गति से पानी उतरेगा, उसी तेजी से मामले भी बढ़ने की आशंका है। इस बार दिल्ली-एनसीआर में यमुना किनारे लंबे समय तक बाढ़ का जमा रहा। यमुना का जलस्तर भी बार-बार खतरे के निशान के ऊपर जा रहा है।

ऐसे में अभी राहत की उम्मीद नहीं दिख रही। इस समस्या को देखते हुए यूनिसेफ ने भी चिंता जाहिर की है। डॉक्टरों का कहना है कि इन क्षेत्रों में रहने वाले छोटे बच्चे और महिलाओं पर विशेष ध्यान देने की जरूरत है। खासकर गर्भवती महिलाएं को। इन क्षेत्रों में इस समय गंदगी, गंदे पानी की समस्या सबसे ज्यादा होने की आंशका है।

दरअसल बृहस्पतिवार को दिल्ली में स्वास्थ्य विभाग ने यूनिसेफ के साथ मिलकर खसरा और रूबेला के खिलाफ लड़ाई को लेकर एक वर्कशॉप का आयोजन किया। इस वर्कशॉप में सवालों का जवाब देते हुए विशेषज्ञों ने चिंता जाहिर की बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में गंदगी और गंदे पानी के कारण संचारी रोग बढ़ने की आशंका है।

इसके अलावा शौचालय के अभाव व अन्य कारणों से महिलाओं में स्त्री रोग तेजी से बढ़ सकते हैं। ऐसे मामलों को लेकर सतर्क रहने की जरूरत है। साथ ही बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में पांच साल से छोटे बच्चों के लिए खसरा और रुबेला वैक्सीनेशन अभियान चलाना चाहिए और यहां रहने वाले लोगों को संचारी रोग से बचाव के लिए जागरूक करना होगा।

ये संचारी रोग होने की अधिक आशंका

  • हैजा
  • डेंगू-ज्वर
  • सूजाक
  • इनफ्लुएंजा
  • मलेरिया
  • खसरा – टाइफाइड
  • पीत ज्वर
  • मियादी बुखार(टायफॉयड)

साल के अंत तक खत्म होगा

बैठक में ऑनलाइन माध्यम से स्वास्थ्य विभाग की अतिरिक्त आयुक्त (प्रतिरक्षण) डॉ. वीना धवन ने कहा कि आईएमआई 5.0 अभियान के तहत इस अंत तक खसरा और रूबेला को पूरी तरह से देश से खत्म करने का संकल्प लिया गया है। बैठक में डॉक्टरों का कहना है कि खसरे से गंभीर जटिलताएं हो सकती हैं, जिनमें निमोनिया, मस्तिष्क क्षति, बहरापन, अंधापन हो सकता है। कई मामलों में मौत भी हो सकती है।

टीकाकरण को लेकर गलत धारणाएं

यूनिसेफ से आए डॉ. आशीष चौहान ने कहा कि देश में टीकाकरण को लेकर कई गलत धारणाए हैं। इन्हें दूर करने की जरूरत है। अक्सर देखा गया है कि लोग टीका लगाने की जगह झाड़ फूंक पर ध्यान देते हैं। वहीं टीकाकरण पर राष्ट्रीय तकनीकी सलाहकार समूह (एनटीएजीआई) के प्रमुख डॉ. एन.के. अरोड़ा ने कहा कि हमें मिलकर टीके के प्रति झिझक को खत्म करना है।

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