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डबल डेकर बस
– फोटो : अमर उजाला
विस्तार
दिल्ली की सड़कों पर फिलहाल डबल डेकर बसों को उतारने की योजना अधर में है। ऊंचाई अधिक और फुटओवर ब्रिज, अंडरपास की अड़चनों की वजह से बसों की निर्बाध आवाजाही की राह में कई मुश्किलें हैं, इसलिए डबल डेकर बसों के चलने की उम्मीद नगण्य रह गई है।
कुछ महीने पहले परिवहन विभाग ने 25 बसों को रिंग रोड पर चलाने का प्रस्ताव तैयार किया था। इन बसों के परिचालन की संभावनाएं तलाशने के लिए अध्ययन भी किया गया। जी-20 शिखर सम्मेलन से पहले 25 डबल डेकर बसों के परिचालन की संभावनाएं पता करने के लिए किए अध्ययन के परिणाम को देखते हुए इस पर निर्णय लिया गया।
पिछले वर्षों के दौरान दिल्ली में सड़कों पर कई फ्लाईओवर, अंडरपास और फुट ओवरब्रिज बनाए गए। इससे वाहनों की आवाजाही में सहूलियतें बढ़ीं, लेकिन अब डबल डेकर की राह में अड़चन पैदा कर रही हैं। एक अधिकारी ने बताया कि अध्ययन के परिणाम में डबल डेकर बसों के परिचालन की राह में कुछ अड़चनें सामने आईं।
इन्हें दूर करना फिलहाल संभव नहीं है। फुटओवर ब्रिज, फ्लाईओवर और अंडरपास के अलावा कई जगह ओवरहेड तार होने की वजह से डबल डेकर बसों की आवाजाही की राह में रुकावट की आशंका जताई गई। इन वजहों से दिल्ली की सड़कों पर दोबारा डबल डेकर बसों के परिचालन पर फिलहाल विराम लग गया है।
दिल्ली की सड़कों पर 32 साल बाद दोबारा डबल डेकर बसें उतारने के लिए प्रस्ताव पेश किया गया था। बस की दोनों मंजिलों पर यात्रियों के बैठने की सुविधा होने से बसों की कमी से होने वाली परेशानी दूर होने की उम्मीद की जा रही थी। बसों का परिचालन शुरू करने के लिए संभावनाएं तलाशने के लिए अध्ययन किया गया। अध्ययन में सामने आए तथ्यों को देखते हुए प्रस्ताव आगे नहीं बढ़ सका। डबल डेकर बसों को शुरुआत में रिंग रोड पर चलाने की दिशा में पहल की गई थी।
‘सुविधा सेवा’ की दोबारा शुरुआत पर दुविधा
70 के दशक में दिल्ली में ‘’सुविधा सेवा’’ के तहत डबल डेकर बसें चलाई गई थीं। इसमें चालक का केबिन यात्रियों के डेक से अलग होता था और इन बसों को ट्रेलर के तौर पर जाना जाना था। बस के दोनों फ्लोर पर यात्रियों के लिए बैठने की सुविधा थी, लेकिन बस का संतुलन नहीं बिगड़े इसलिए ऊपरी मंजिल पर किसी भी यात्री को खड़े होकर सफर करने की इजाजत नहीं थी। यात्रियों को सफर में दिक्कत नहीं हो, इसलिए दोनों डेक के लिए अलग-अलग कंडक्टर होते थे। इससे यात्रियों को सहूलियत होती थी।
अधिक ऊंचाई होने के कारण बंद की गई थीं बसें
1982 में श्रीनिवासपुरी डिपो से 20 बसें अलग-अलग मार्गों पर चलती थी। इनमें मुद्रिका (रिंग रोड), लाल किला से प्रेस एन्क्लेव के अलावा दूसरे मार्गों पर भी डबल डेकर बसें 90 के दशक की शुरुआत तक चलती रहीं। रिंग रोड पर निर्मित पुल और फुटओवर ब्रिज की ऊंचाई के कारण इसे बंद कर दिया गया, खासकर कश्मीरी गेट, मोती बाग सहित रिंग रोड पर कई जगहों पर डबल डेकर बसों के लिए उचित नहीं मानते हुए फिलहाल प्रस्ताव को अमली जामा नहीं पहनाया जा रहा है।
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