Delhi: साहित्य अकादमी के कथाकार महेश दर्पण ने किया रेनू अंशुल के कहानी संग्रह ‘पॉकेट में इश्क’ का विमोचन

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‘पाकेट में इश्क’ का विमोचन

‘पाकेट में इश्क’ का विमोचन
– फोटो : अमर उजाला

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साहित्य अकादमी के वरिष्ठ कथाकार महेश दर्पण ने बुधवार को दिल्ली में रेनू अंशुल की इश्क़, प्यार, मुहब्बत, उल्फ़त पर आधारित 25 कहानियों के संग्रह ‘पाकेट में इश्क’ का विमोचन किया। इसकी लेखिका रेनू ‘अंशुल’ ने कहा कि अपनी पिछली तीनों किताबों से मेरा चौथा कहानी संग्रह थोड़ा अलग है। ‘पॉकेट में इश्क़’ दरअसल आजकल जिस तरह हिन्दी- इंग्लिश की मिली जुली भाषा हमारे बोलने के प्रचलन में है, इसी के आधार पर इसका टाइटिल है।

 

हम सभी मानते हैं कि साहित्य समाज का दर्पण होता है और एक साहित्यकार के रूप में जो कुछ हम देखते सुनते हैं वही अपने शब्दों में उकेरा है। प्यार दिल का एक खूबसूरत सा अहसास है, लेकिन आज के आधुनिक युग में इसका स्वरूप भी बदल गया है।

 

इस पुस्तक में कहानियों के माध्यम से यही अंतर समझाया गया है कि आज के युवा वर्ग को इन्सटेंट फास्ट फूड की तरह प्यार भी बिलकुल इन्स्टेंट ही चाहिए। रेनू कहती हैं कि युवा ही नहीं, बल्कि बड़ी उम्र के लोगों की भी अब सोच बदली है। वो भी प्यार को दिल में न दबाकर अपने मन की बात कहना पसंद करते हैं। अपनी तन्हा ज़िन्दगी को खुशनुमा बनाने की कोशिश करते है।

विस्तार

साहित्य अकादमी के वरिष्ठ कथाकार महेश दर्पण ने बुधवार को दिल्ली में रेनू अंशुल की इश्क़, प्यार, मुहब्बत, उल्फ़त पर आधारित 25 कहानियों के संग्रह ‘पाकेट में इश्क’ का विमोचन किया। इसकी लेखिका रेनू ‘अंशुल’ ने कहा कि अपनी पिछली तीनों किताबों से मेरा चौथा कहानी संग्रह थोड़ा अलग है। ‘पॉकेट में इश्क़’ दरअसल आजकल जिस तरह हिन्दी- इंग्लिश की मिली जुली भाषा हमारे बोलने के प्रचलन में है, इसी के आधार पर इसका टाइटिल है।

 

हम सभी मानते हैं कि साहित्य समाज का दर्पण होता है और एक साहित्यकार के रूप में जो कुछ हम देखते सुनते हैं वही अपने शब्दों में उकेरा है। प्यार दिल का एक खूबसूरत सा अहसास है, लेकिन आज के आधुनिक युग में इसका स्वरूप भी बदल गया है।

 

इस पुस्तक में कहानियों के माध्यम से यही अंतर समझाया गया है कि आज के युवा वर्ग को इन्सटेंट फास्ट फूड की तरह प्यार भी बिलकुल इन्स्टेंट ही चाहिए। रेनू कहती हैं कि युवा ही नहीं, बल्कि बड़ी उम्र के लोगों की भी अब सोच बदली है। वो भी प्यार को दिल में न दबाकर अपने मन की बात कहना पसंद करते हैं। अपनी तन्हा ज़िन्दगी को खुशनुमा बनाने की कोशिश करते है।



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