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दिल्ली हाईकोर्ट
– फोटो : एएनआई
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दिल्ली हाईकोर्ट ने 26 वर्षीय राष्ट्रीय स्तर की महिला निशानेबाज दिशा लैंगन (28) के खिलाफ सीमा शुल्क कानून के तहत एक आपराधिक शिकायत को खारिज कर दिया। अदालत ने कहा कि पिता के कृत्यों के लिए खिलाड़ी को दंडित नहीं किया जा सकता। न्यायमूर्ति सौरभ बनर्जी ने कहा कि प्रथम दृष्टया सीमा शुल्क अधिनियम के प्रावधानों के तहत दिशा के खिलाफ कोई मामला नहीं बनता, क्योंकि उसके खिलाफ लगाए गए आरोप उस अपराध के आवश्यक तत्वों को स्थापित नहीं करते। इस बात के कोई सबूत नहीं हैं कि दिशा को अपने पिता के अपराधों के बारे में जानकारी थी।
उसके पिता पर आरोप था कि उसने दिशा के प्रमाणपत्रों और लाइसेंस का इस्तेमाल कर विदेश से लाए गए हथियारों को एक सिंडिकेट के साथ मिलकर भारी मुनाफे के साथ भारत में बेचा। इसके अलावा हथियारों का इस्तेमाल वन्यजीव जानवरों के शिकार के लिए भी करने की शिकायत दी गई थी।
न्यायमूर्ति सौरभ बनर्जी ने कहा, इस तथ्य पर विचार करते हुए कि याचिकाकर्ता 26 साल की एक युवा लड़की है। उसका भविष्य उज्ज्वल है। वह कानून की पढ़ाई के साथ-साथ शूटिंग के माध्यम से अपनी आकांक्षाओं को ऊंची उड़ान दे रही है और देश का नाम रोशन कर रही है। केवल उसके लाइसेंस का इस्तेमाल उसके पिता के कृत्यों के लिए किए जाने पर उसे दंडित नहीं किया जा सकता।
अधिकांश भारतीय परिवारों में यह सामान्य प्रथा है कि माता-पिता अपने बच्चे का समर्थन करने और उनकी मांगों की पूर्ति करने की भूमिका निभाते हैं। यह सामान्य ज्ञान की बात है कि अधिकांश छात्र अपने माता-पिता पर निर्भर होते हैं। अदालत का विचार है कि अन्य छात्राें की तरह याचिकाकर्ता अपनी पढ़ाई और शूटिंग प्रैक्टिस में व्यस्त रही होगी। इसलिए उसके पिता ने उसके लिए हथियार और गोला-बारूद खरीदने के लिए सभी व्यवस्थाएं करने के लिए हामी भर दी। मुख्य मेट्रोपोलिटन मजिस्ट्रेट ने महिला को समन जारी करने की कार्रवाई में गलती की।
डीआरआई ने पिता को लाइसेंस का गलत इस्तेमाल करने के लिए पकड़ा
राजस्व खुफिया निदेशालय (डीआरआई) की शिकायत के अनुसार, एक विशिष्ट खुफिया जानकारी के आधार 29 अप्रैल, 2017 को महिला के पिता समेत तीन लोगों को इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर रोका गया था। याचिकाकर्ता के पिता ने फर्जी चालान का इस्तेमाल कर छिपाकर हथियारों का आयात किया था। इसके लिए उसने दिल्ली पुलिस की ओर से जारी शस्त्र और गोला बारूद लाइसेंस और नेशनल राइफल एसोसिएशन ऑफ इंडिया (एनआरएआई) की ओर से जारी निशानेबाज प्रमाणपत्र का इस्तेमाल किया था।
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