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परिवहन विभाग की गठित समिति मौजूदा दरों का मूल्यांकन कर तैयार करेगी प्रस्ताव
वर्तमान में दिल्ली में 950 से अधिक पीयूसी केंद्र चल रहे
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। राजधानी में वाहन चालकों को प्रदूषण जांच कराने के लिए अधिक भुगतान करना पड़ सकता है। दिल्ली परिवहन विभाग ने वाहन प्रदूषण जांच (पीयूसी) की दर बढ़ाने की प्रक्रिया के लिए समिति का गठन किया है, जोकि मौजूदा दरों का मूल्यांकन कर जांच दर बढ़ाने के लिए प्रस्ताव तैयार करेगी। ऐसे में पीयूसी की जांच महंगी हो सकती है। मौजूदा समय में दोपहिया वाहन की प्रदूषण जांच के लिए 60 रुपये, पेट्रोल चालित चार पहिया वाहन के लिए 80 रुपये और डीजल वाहन के लिए 100 रुपये देने होते हैं। इसके अलावा अलग से 18 प्रतिशत जीएसटी देना होता है। बीएस-6 वाहनों की वर्ष में एक बार और बीएस-4 वाहनों की हर छह माह में एक बार प्रदूषण जांच करानी होती है।
बता दें कि वर्ष 2011 से पीयूसी की आखिरी बार जांच दर बढ़ाई गई थी। वर्तमान में दिल्ली में 950 से अधिक पीयूसी केंद्र हैं। वर्ष 2022 में कुल 50 लाख प्रदूषण जांच प्रमाण पत्र जारी किए गए थे। परिवहन विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि जिस तरह से प्रदूषण जांच न कराने वालों का चालान बढ़ा है, उस हिसाब से जांच दर नहीं बढ़ी है। उन्होंने बताया कि सितंबर से पहले इसे लागू करना प्रक्रिया है। प्रदूषण जांच केंद्रों की दिक्कतों को देखते हुए शुल्क बढ़ाए जाने पर विचार किया जा रहा है। इस पर ली जाने वाली फीस बढ़ाने के लिए राशि तय की जा रही है, जिससे लोगों पर बोझ भी न पड़े और जांच केंद्रों का काम भी चलता रहे।
पीयूसी केंद्र संचालकों भी लंबे समय से जांच दर बढ़ाने की मांग कर रहे हैं। इसमें वह 120 से 250 रुपये के बीच दर बढ़ाने को कह रहे हैं। आरके पुरम के पीयूसी केंद्र संचालक ने बताया कि सालाना रखरखाव के खर्च का करार आदि कई नई व्यवस्थाओं से जांच केंद्र चलाने वालों का ज्यादा खर्च आ रहा है। अरसे से फीस में वृद्धि तक नहीं की गई है।
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