Delhi Ordinance: डॉ. आंबेडकर की विद्वता पर सवाल, उन्होंने कहा था- राजधानी पर ‘दिल्ली’ राज्य का अधिकार नहीं

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Delhi Ordinance: Dr. Ambedkar had said Delhi state has no right on the capital

Delhi Ordinance bill- Amit Shah
– फोटो : Amar Ujala/Sonu Kumar

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दिल्ली सेवा विधेयक को लेकर लोकसभा में गुरुवार को शुरू हुई चर्चा में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने बताया कि यह बिल क्यों जरूरी है। उन्होंने कहा, संविधान में ऐसा प्रावधान है, जो केंद्र को दिल्ली के लिए कानून बनाने की अनुमति देता है। विपक्ष ने इस बिल को सुप्रीम कोर्ट के आदेश का उल्लंघन बताया है, जबकि ऐसा कुछ भी नहीं है। सब कुछ कानून और संविधान के दायरे में हो रहा है। उन्होंने संविधान निर्माता डॉ. बीआर अंबेडकर, प्रथम प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू और सरदार पटेल का भी नाम लिया। दिल्ली में चार मुख्यमंत्रियों के साथ काम कर चुके पूर्व विधानसभा सचिव एवं संविधान विशेषज्ञ एसके शर्मा बताते हैं, डॉ. बीआर अंबेडकर ने बाकायदा संविधान में ही ऐसी व्यवस्था कर दी थी कि भारत की राजधानी में कोई भी कानून भारत की संसद ही बनाएगी। अब जो कुछ हो रहा है, वह सीधे तौर पर डॉ. अंबेडकर की विद्वता पर सवाल उठाना है।  

असल विवाद की जड़ तो ये है

एसके शर्मा के मुताबिक, दिल्ली में चुनी हुई सरकार ‘पंजाब, हरियाणा या उत्तर प्रदेश की तर्ज पर शासन करना चाहती है। असल विवाद की यही जड़ है। दिल्ली को लेकर कानून बनाने का अधिकार, केंद्र के पास है। दिल्ली में जितने कानून बने हैं, वे सब कानून संसद ने बनाए हैं। संविधान निर्माता डॉ. बीआर अंबेडकर ने संविधान में यह व्यवस्था दी है। दिल्ली को पूर्ण राज्य की मांग करना, डॉ अंबेडकर की विद्वता पर सवाल उठाना है। इससे पहले आम आदमी पार्टी, दिल्ली को पूर्ण राज्य का दर्जा देने की मांग उठा चुकी है। 1947 में जब स्वतंत्र भारत के लिए संविधान का निर्माण हो रहा था, तो उस वक्त दिल्ली को भी पूर्ण राज्य का दर्जा देने की बात सामने आई थी। संविधान सभा ने इस मामले में पट्टाभि सीतारमैया की अध्यक्षता में एक कमेटी गठित की थी।

कमेटी की रिपोर्ट को डॉ. अंबेडकर ने किया खारिज

कमेटी की रिपोर्ट में दिल्ली को पूर्ण राज्य का दर्जा देने पर सहमति बनी। यह रिपोर्ट जब डॉ. राजेंद्र प्रसाद के जरिए डॉ. अंबेडकर तक पहुंची तो उन्होंने इसे खारिज कर दिया। डॉ. अंबेडकर का कहना था कि भारत की राजधानी पर दिल्ली राज्य का अधिकार नहीं हो सकता है। दिल्ली को लेकर केंद्र सरकार ही कानून पास करेगी। इसमें राज्य का कोई दखल नहीं होगा। 1987 में दिल्ली को पूर्ण राज्य बनाने के लिए बालाकृष्णन कमेटी बनी। कमेटी ने कहा, कानून व्यवस्था में कोई बदलाव दिल्ली के हित में नहीं है। इसके बाद दिल्ली सरकार और अफसरों के बीच हुए टकराव के बाद केंद्र ने संसद के जरिए एनसीटी सरकार (संशोधन) अधिनियम 2021 लागू कर दिया। इसमें चुनी हुई सरकार के ऊपर उपराज्यपाल को प्रधानता दी गई।






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