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फाइल फोटो
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कंझावला कांड के बाद पीसीआर व्यवस्था पर सवाल उठने लगे हैं। 31 दिसंबर की रात में 13 किलोमीटर, सुल्तानपुरी से कंझावला के बीच, पांच प्वाइंट पर पीसीआर वैन तैनात थी। अंजलि को कार से घसीटते हुए देखकर राहगीरों ने 17 पीसीआर कॉल की। युवती को कार से घसीटने की सूचना मिलने के बाद दो पीसीआर के स्टाफ ने एरिया नहीं होने की बात कर रूट पर जाने से इन्कार कर दिया।
इसके बाद तीन पीसीआर ने भी इधर-उधर चक्कर काटने के बाद सड़क पर कुछ नहीं मिलने की बात कहीं। इन सबके बाद पूरे पीसीआर सिस्टम पर सवाल उठने लगे। दरअसल पूर्व पुलिस आयुक्त राकेश अस्थाना ने पीसीआर यूनिट को खत्म कर पीसीआर वैन को थानों से अटैच कर दिया था।
इसके बाद पीसीआर वैन पर तैनात स्टाफ थाना एरिया को लेकर झगड़ा करने लगा। पुराने सिस्टम में कॉल मिलने पर पूरे जिले में तैनात पीसीआर वैन किसी भी थाने के एरिया में चली जाती थी। कंझावला कांड के बाद पूरे पीसीआर सिस्टम को दोबारा से रिव्यू करने के लिए कहा जाने लगा।
पीसीआर सिस्टम को लेकर उठ रहे सवालों के बीच अमर उजाला के छह संवाददाताओं ने छह अलग-अलग रूट पर पीसीआर वैन का रियलिटी चेक किया। ज्यादातर जगहों पर स्थिति बहुत ही दयनीय मिली। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि कैसे दिल्ली वासियों की सुरक्षा होगी।
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