Delhi Riots : गुलफिशा ने कहा-भाषण या मिर्च पाउडर के इस्तेमाल का सबूत नही, दूसरे मामले में जेल अधिकारी तलब

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दिल्ली हाईकोर्ट

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– फोटो : एएनआई

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दिल्ली दंगा मामलों में आरोपी गुलफिशा फातिमा ने शुक्रवार को दिल्ली हाईकोर्ट को बताया कि यह दिखाने के लिए कोई सबूत नहीं है कि उसने कोई भाषण दिया था या मिर्च पाउडर का इस्तेमाल किया था या महिलाओं को इकट्ठा करने के लिए प्रोत्साहित किया था। उन्होंने कहा दिल्ली पुलिस का आरोप निराधार है ऐसे में वह जमानत की हकदार है।

न्यायमूर्ति सिद्धार्थ मृदुल और न्यायमूर्ति रजनीश भटनागर की विशेष पीठ दिल्ली पुलिस की अपराध शाखा की ओर से दर्ज मामले में गुलफिशा को जमानत देने से इनकार करने के निचली अदालत के आदेश के खिलाफ उसकी अपील पर सुनवाई कर रही है।

गुलफिशा की ओर से पेश वकील ने पीठ के समक्ष तर्क रखा कि गुलफिशा से किसी सामग्री की बरामदगी नहीं हुई है। जिस समय गुलफिशा को गिरफ्तार किया गया था उस समय पुलिस ने केवल एक गवाह का बयान दर्ज किया था। वकील ने हालांकि कहा कि उक्त बयान प्रकृति में सामान्य है और किसी घटना के लिए विशिष्ट नहीं है। उक्त गवाहों का बयान अभियोजन पक्ष के उभरते आख्यान में फिट होने के लिए दर्ज किया गया था।

जेल अधिकारी तलब…
एक अन्य मामले में अदालत ने दिल्ली दंगों के आरोपी शरजील इमाम, गुलफिशा फातिमा और शिफा-उर-रहमान को परिवार से टेलीफोन पर बातचीत की सुविधा वापस लेने पर तिहाड़ जेल अधीक्षकों और विधि अधिकारी (जेल) को तलब किया है। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश अमिताभ रावत की अदालत के समक्ष उपस्थित तीनों आरोपियों की ओर से पेश वकीलों ने कहा कि दिल्ली जेल नियम, 2018 के नियम 631 के तहत कॉलिंग की सुविधा दी जा रही थी, लेकिन अधिसूचना के बाद इसे बंद कर दिया गया।

अदालत को बताया गया कि अधीक्षक जेल नंबर 8 का एक पत्र रिकॉर्ड में है जिसमें कहा गया है कि कॉल करने की सुविधा सह-आरोपी मीरान हैदर को दी जा रही थी, क्योंकि उनकी राय थी कि नियम 631 यूएपीए को कवर नहीं करता है। अदालत ने विधि अधिकारी (जेल) (मुख्यालय) को 7 जनवरी को व्यक्तिगत रूप से पेश होने का निर्देश दिया है। अब इस मामले की सुनवाई 7 जनवरी को होगी।

दिल्ली दंगा मामलों में आरोपी गुलफिशा फातिमा ने शुक्रवार को दिल्ली हाईकोर्ट को बताया कि यह दिखाने के लिए कोई सबूत नहीं है कि उसने कोई भाषण दिया था या मिर्च पाउडर का इस्तेमाल किया था या महिलाओं को इकट्ठा करने के लिए प्रोत्साहित किया था। उन्होंने कहा दिल्ली पुलिस का आरोप निराधार है ऐसे में वह जमानत की हकदार है।

न्यायमूर्ति सिद्धार्थ मृदुल और न्यायमूर्ति रजनीश भटनागर की विशेष पीठ दिल्ली पुलिस की अपराध शाखा की ओर से दर्ज मामले में गुलफिशा को जमानत देने से इनकार करने के निचली अदालत के आदेश के खिलाफ उसकी अपील पर सुनवाई कर रही है।

गुलफिशा की ओर से पेश वकील ने पीठ के समक्ष तर्क रखा कि गुलफिशा से किसी सामग्री की बरामदगी नहीं हुई है। जिस समय गुलफिशा को गिरफ्तार किया गया था उस समय पुलिस ने केवल एक गवाह का बयान दर्ज किया था। वकील ने हालांकि कहा कि उक्त बयान प्रकृति में सामान्य है और किसी घटना के लिए विशिष्ट नहीं है। उक्त गवाहों का बयान अभियोजन पक्ष के उभरते आख्यान में फिट होने के लिए दर्ज किया गया था।

जेल अधिकारी तलब…

एक अन्य मामले में अदालत ने दिल्ली दंगों के आरोपी शरजील इमाम, गुलफिशा फातिमा और शिफा-उर-रहमान को परिवार से टेलीफोन पर बातचीत की सुविधा वापस लेने पर तिहाड़ जेल अधीक्षकों और विधि अधिकारी (जेल) को तलब किया है। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश अमिताभ रावत की अदालत के समक्ष उपस्थित तीनों आरोपियों की ओर से पेश वकीलों ने कहा कि दिल्ली जेल नियम, 2018 के नियम 631 के तहत कॉलिंग की सुविधा दी जा रही थी, लेकिन अधिसूचना के बाद इसे बंद कर दिया गया।

अदालत को बताया गया कि अधीक्षक जेल नंबर 8 का एक पत्र रिकॉर्ड में है जिसमें कहा गया है कि कॉल करने की सुविधा सह-आरोपी मीरान हैदर को दी जा रही थी, क्योंकि उनकी राय थी कि नियम 631 यूएपीए को कवर नहीं करता है। अदालत ने विधि अधिकारी (जेल) (मुख्यालय) को 7 जनवरी को व्यक्तिगत रूप से पेश होने का निर्देश दिया है। अब इस मामले की सुनवाई 7 जनवरी को होगी।



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