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सुप्रीम कोर्ट
– फोटो : अमर उजाला
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सुप्रीम कोर्ट ने सेंट स्टीफंस कॉलेज को अल्पसंख्यक कोटा के तहत छात्रों को प्रवेश देने के लिए उनके सामान्य विश्वविद्यालय प्रवेश परीक्षा (सीयूईटी) के अंकों के अलावा साक्षात्कार की अनुमति देने वाले हाईकोर्ट के अंतरिम आदेश में दखल देने से इन्कार कर दिया। जस्टिस एएस बोपन्ना और जस्टिस पीएस नरसिम्हा की पीठ ने कहा कि इस स्तर पर कोई भी हस्तक्षेप प्रवेश प्रक्रिया में भ्रम और अनिश्चितता पैदा करेगा।
पीठ ने कहा, चूंकि विवादित आदेश एक लंबित रिट याचिका में हाईकोर्ट की ओर से पारित अंतरिम आदेश है, इस स्तर पर, हमें हाईकोर्ट के आदेश में हस्तक्षेप करने का कोई कारण नहीं दिखता है। पीठ ने हाईकोर्ट से इस मामले में मामले में निश्चितता की आवश्यकता पर विचार करते हुए जल्द निर्णय लेने को भी कहा। पीठ दिल्ली विश्वविद्यालय व विश्वविद्यालय अनुदान आयोग की ओर से हाईकोर्ट के 21 जुलाई के आदेश को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई कर रही थी।
विश्वविद्यालय की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने पीठ को बताया कि चयन प्रक्रिया अभी भी चल रही है और हाईकोर्ट के आदेश पर रोक लगाने की मांग की। कॉलेज की दलील अंतरिम आदेश के आधार पर चयन हो चुका : सेंट स्टीफंस कॉलेज के वकील ए मारियारपुथम ने कहा कि एक अंतरिम आदेश है, छात्रों का चयन किया जा चुका है और कक्षाएं पहले ही शुरू हो चुकी हैं। इस पर पीठ ने कहा, इस स्तर पर वह अंतरिम आदेश में हस्तक्षेप करना उचित नहीं। इससे विद्यार्थियों में भ्रम पैदा होगा।
हाईकोर्ट के आदेश से मेधावी छात्रों को छोड़ दिया जा रहा: मेहता
मेहता ने कहा, साक्षात्कार हमेशा एक व्यक्तिपरक चीज होती है। हाईकोर्ट के आदेश के कारण, मेधावी छात्रों को छोड़ दिया जा रहा है। यह एक अल्पसंख्यक संस्थान है, इसलिए 50 फीसदी सीटें अल्पसंख्यक छात्रों से भरी जाती हैं। इसमें कोई कठिनाई नहीं है। सवाल यह है कि 50 फीसदी आरक्षित सीटें कैसे भरी जाती हैं। पहला, अखिल भारतीय योग्यता सूची यानी सीयूईटी के अनुसार। पिछले साल वे 50 फीसदी सीटें भरने के लिए साक्षात्कार रखना चाहते थे, डीयू ने उन्हें इस 50 प्रतिशत सीटों में से 15 प्रतिशत साक्षात्कार के माध्यम से भरने का निर्देश दिया।
साक्षात्कार से भरी गईं सीटें ‘भुगतान सीटें’ बन गईं : मेहता ने कहा कि यदि हाईकोर्ट इस निष्कर्ष पर पहुंचता है कि अंतरिम आदेश गलत था और प्रत्येक प्रवेश योग्यता सूची के आधार पर होना चाहिए था, तो उन मेधावी छात्रों का क्या होगा जिनका इस साक्षात्कार प्रक्रिया के कारण चयन नहीं हुआ। साक्षात्कार के आधार पर भरी गई सीटें वस्तुतः ‘भुगतान सीटें’ बन गई हैं। इस पर पीठ ने कहा कि हाईकोर्ट ने 21 जुलाई को आदेश पारित किया और प्रवेश प्रक्रिया पहले ही हो चुकी है। अब वास्तव में देर हो चुकी है और अधिक अनिश्चितता होगी। एक बार हाईकोर्ट में मामले का पूरी तरह से निपटारा हो जाने पर, छात्रों को पता चल जाएगा कि स्थिति क्या है।
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