23 जून 2023 को मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की पहल पर देशभर के भाजपा-विरोधी दलों की पटना में पहली बैठक हुई। इसके बाद दूसरी बैठक बेंगलुरू और तीसरी मुंबई में हुई है। इस एलायंस के दलों में नीतीश कुमार की पार्टी जनता दल यूनाईटेड का मध्य प्रदेश चुनाव में स्वतंत्र रूप से भाग लेना चर्चा का विषय था। क्योंकि, नीतीश ने ही विपक्षी एकता के लिए पहल की थी। इसके बावजूद कांग्रेस के नंबर वन नेता राहुल गांधी राष्ट्रीय जनता दल अध्यक्ष लालू प्रसाद से करीब और नीतीश कुमार से दूर नजर आ रहे थे। पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव के बहाने कांग्रेस ने इंडी एलायंस से किनारे किया तो नीतीश कुमार ने खुले मंच से कटाक्ष भी किया। लेकिन, अब नीतीश की बात जमीनी परिणाम के रूप में सामने है। मध्य प्रदेश के परिणाम ने इंडी एलायंस में कांग्रेस के साथ-साथ बाकी दलों की भी हालत-हकीकत बयां कर दी है। नीतीश अभी बीमारी के नाम पर सीन से बाहर हैं और इधर चुनावों में दुर्गति के बाद कांग्रेस ने इंडी एलायंस को लेकर तेजी दिखाई है।
जदयू ने एमपी विधानसभा में 10 सीटों पर प्रत्याशी दिए। इनमें से नौ ने चुनाव लड़ा। जदयू के नौ प्रत्याशियों ने कुल मिलाकर 5758 वोट हासिल किया। यानी, प्रति सीट औसतन 640 से भी कम वोट। सर्वाधिक 3103 वोट थांदला विधानसभा सीट पर मिला, जहां यह वोट कटने के बाद भी कांग्रेस ने ही जीत दर्ज की।
जिन नौ सीटों पर जदयू के प्रत्याशियों ने वोटकटवा की भूमिका निभाई, उनमें से सात सीटों पर भारतीय जनता पार्टी को जीत मिली। दो सीटों पर कांग्रेस ने जीत हासिल की। थांदला विधानसभा क्षेत्र से कांग्रेस के वीर सिंह भूरिया ने जीत दर्ज की। उन्हें 105197 वोट मिले। भाजपा प्रत्याशी को यहां 103857 वोट मिले। जदयू के तोलसिंह भूरिया को यहां 3103 वोट मिले। बालाघाट विधानसभा क्षेत्र से कांग्रेस के अनुभा मुंजारे ने जीत दर्ज की। उन्हें 108770 वोट मिले। भाजपा प्रत्याशी को यहां 79575 वोट मिले। जदयू के विजय कुमार पाटले को यहां 110 वोट मिले। बालाघाट में कांग्रेस की जीत के साथ ही यह भी दिखा कि जदयू समेत इंडी एलायंस के दल आप के भी उतरने से ज्यादा कोई नुकसान नहीं हुआ। आप ने 1021 वोट हासिल किए।
सात में से दो पर हार में इंडी एलायंस वजह
जदयू प्रत्याशियों ने इन नौ सीटों पर भले ही वोटों के मामले में बहुत कामयाबी हासिल नहीं की, लेकिन इंडी एलायंस की दिल्ली में संभावित अगली बैठक से पहले यह जानना रोचक होगा कि राहुल गांधी के नेतृत्व वाली कांग्रेस पार्टी की हार में दो सीटों पर इंडी एलायंस के दलों की अहम भूमिका रही। पेटलावाद विधानसभा क्षेत्र से भाजपा की निर्मला दिलीपसिंह भूरिया ने जीत दर्ज की। उन्हें 101512 वोट मिले। कांग्रेस प्रत्याशी को यहां 95865 वोट मिले। जदयू के रामेश्वर सिंगार को यहां 1001 वोट मिले। बसपा ने 2517 वोट हासिल किया। आम आदमी पार्टी ने 7440 वोट हासिल किए। यहां आप और जदयू का वोट कांग्रेस को मिला होता तो भाजपा प्रत्याशी हार जातीं। एक और सीट, राजनगर विधानसभा क्षेत्र से भाजपा के अरिवंद पटेरिया ने जीत दर्ज की। उन्हें 69698 वोट मिले। कांग्रेस प्रत्याशी को यहां 63831 वोट मिले। जदयू की रामकुंवर रानी रायकवाड़ को यहां 472 वोट मिले। सपा ने 6353 वोट हासिल किए। आप ने 1729 वोट हासिल किए। यहां बसपा ने 32195 वोट हासिल किया। मायावती की पार्टी बसपा का वोट अलग कटता, लेकिन अखिलेश यादव की पार्टी सपा के साथ जदयू का वोट कांग्रेस के खाते में जाता तो यह सीट भाजपा की नहीं होती।
दो के अलावा यह सीट भी मिलती अगर एक होते
इंडी एलायंस को एकजुट करने का प्रयास कांग्रेस अब कर रही है। अगर पहले किया होता तो पटेलावाद, राजनगर के अलावा बहोरीबंद भी इंडी एलायस के खाते में आ सकता था। जदयू ने यहां भी प्रत्याशी उतारा था। जदयू के प्रत्याशी पंकज मौयाार् को 141 वोट ही मिले, लेकिन सपा ने यहां 21598 वोट कांग्रेस के खाते से छीन लिए। बहोरीबंद विधानसभा क्षेत्र से भाजपा के प्रणय प्रभात पांडेय ने जीत दर्ज की। उन्हें 94817 वोट मिले। कांग्रेस प्रत्याशी को यहां 71195 वोट मिले। इसके अलावा बसपा ने 1610 वोट हासिल किया। अगर इंडी एलायंस ने यहां संयुक्त रूप से प्रत्याशी दिया होता तो मुकाबला कितना नजदीकी होता, यह अनुमान अलग-अलग आए वोटों को जोड़कर निकाला जा सकता है। यह भी संभव है कि तब भाजपा से यह सीट छिन जाती।
तीन सीटों पर एकता का असर होता, चार पर बेअसर
जदयू ने जिन नौ सीटों पर प्रत्याशी दिए, उनमें कांग्रेस ने दो जीती। इंडी एलायंस के वोट जुड़ जाते तो तीन और सीट कांग्रेस के खाते में चली जाती। हालांकि, कांग्रेस इंडी एलायंस को दरकिनार कर इस चुनाव में अपनी ताकत आजमाने के फैसले को इस आधार पर सही भी बता सकती है कि जदयू प्रत्याशी वाली नौ सीटों में से चार सीटों पर तो इंडी एलायंस के बाकी दल कुछ प्रभाव नहीं दिखा सके। जैसे, विजयराघवगढ़ विधानसभा क्षेत्र से भाजपा के संजय सत्येंद्र पाठक ने जीत दर्ज की। उन्हें 98010 वोट मिले। कांग्रेस प्रत्याशी को यहां 73644 वोट मिले। जदयू के शिवनारायण सोनी को यहां 177 वोट मिले। सपा को 1538 वोट मिले। इसी तरह, पिछोर विधानसभा क्षेत्र से भाजपा के प्रीतम लोढ़ी ने जीत दर्ज की। उन्हें 121228 वोट मिले। कांग्रेस प्रत्याशी को यहां 99346 वोट मिले। जदयू के चंद्रपाल सिंह यादव को यहां 132 वोट मिले। बसपा ने 2208 वोट हासिल किया। सपा ने 372 वोट हासिल किए। मतलब, बसपा को साथ लेकर भी इंडी एलायंस के जदयू-सपा को मिला दें तो कांग्रेस नहीं जीत पाती। जदयू ने जबलपुर उत्तर से भी प्रत्याशी दिया था। यहां से भाजपा के अभिलाष पांडे ने जीत दर्ज की। उन्हें 88419 वोट मिले। कांग्रेस प्रत्याशी को यहां 65764 वोट मिले। जदयू के संजय जैन संजू मामा को यहां 380 वोट मिले। बसपा ने 1051 वोट हासिल किया। यहां भी इंडी एलायंस का फायदा कांग्रेस को नहीं मिलता। इसके अलावा, गोटेगांव में भी यही स्थिति होती। गोटेगांव विधानसभा क्षेत्र से भाजपा के महेंद्र नागेश ने जीत दर्ज की। उन्हें 91737 वोट मिले। कांग्रेस प्रत्याशी को यहां 43949 वोट मिले। जदयू के प्रमोद कुमार मेहरा को 242 वोट मिले।