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सांकेतिक तस्वीर।
– फोटो : सोशल मीडिया
विस्तार
0001, 0108, 0009, 8088 सहित और भी बहुत से नंबर केवल अंकगणित नहीं हैं, बल्कि पूर्वांचल के बाहुबलियों की पहचान भी है। वाराणसी में पूर्व एमलएसी बृजेश सिंह के वाहनों का काफिला 0108 से पहचान रखता है तो उनके भतीजे सैय्यदराजा विधायक सुशील सिंह अपनी 0001 की पहचान के साथ निकलते हैं। वर्षों पुरानी गाड़ी हो या काफिले की अगुवाई करने वाली नई चमचमाती लग्जरी गाड़ी, बेड़े में आगे से लेकर पीछे तक एक ही नंबर के वाहन के दौड़ लगाते हैं।
बाहुबलियों के इस शौक से परिवहन विभाग भी वाकिफ है, यही कारण है कि नेताजी के नंबरों पर उनके इशारे के बिना कोई अधिकार नहीं जमा सकता। अलग अलग विधाओं के ऐसे लोग जो सामाजिक रूप से बाहुबलियों के शागिर्द के रूप में पहचान रखते हैं, उनके भी वाहनों पर यह पहचान नंबर प्लेट पर चस्पा है। अपनी गाड़ी और काफिले से पहचान बनाने वाले जनप्रतिनिधि और बाहुबली जब सड़कों पर निकलते हैं तो लगभग सभी लोगों को बिना शक्ल देखे सिर्फ गाड़ी नंबर से ही इनकी शिनाख्त हो जाती है।
गाड़ियों को लेकर इनकी एक और खासियत होती है। काफिले की सभी गाड़ियां न सिर्फ एक ही नंबर की होती हैं बल्कि उनका रंग भी एक ही होता है। इनसे जुड़े समर्थक भी उसी रंग और नंबर का वाहन लेकर अपनी प्रतिबद्धता जाहिर करते रहते हैं।
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