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तोता। (सांकेतिक)
– फोटो : अमर उजाला
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रंग बिरंगे पंखों और सुरीली आवाज के लिए विख्यात तोता पक्षी लोगों के घरों के पिंजरे में कैद होते जा रहे हैं। इस कारण बाग-बगीचों में इनकी संख्या कम होती जा रही है। यह स्थिति न तो पर्यावरण के अनुकूल है, न जैव विविधता के लिए अच्छी है। बावजूद इसके वन विभाग तोतों को पिंजरे में कैद करने वालों के खिलाफ कार्रवाई नहीं करता है।
आए दिन सड़कों पर पिंजरे में कैद तोतों को बेचते देखा जा सकता है। शिकारी तोतों को पकड़कर धंधा कर रहे हैं। लोग तोतों को पाल कर इस पक्षी को विलुप्ति के कगार पर पहुंचा रहे हैं, लेकिन वन विभाग के अधिकारी खामोश हैं।
बताते हैं कि दशक पहले जंगल कौड़िया, मीरपुर, तुर्कवलिया, मजनू चौक, डोहरिया, नयागांव, फुलवरिया, रायपुर आदि स्थानों पर तोते झुंड के रूप में दिखाई देते थे। अब नहीं दिखाई देते हैं। तोते सामान्य रूप से पेड़ के खोखले घोंसला बनाते हैं। जब ये झुंड में होते थे तब मक्का और बाजरा की फसलों को चाव से खाते थे।
तोते अपनी खूबसूरती और सुरीली आवाज की वजह से इंसानों को प्रिय होते हैं। यही वजह है कि इंसान इन्हें पिंजरे में कैद करके पालता है। बताया जाता है कि दुनिया में तोतों की 399 जातियां पाई जाती हैं। जिन्हें 92 वंशों में संगठित किया जाता है।
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