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शहर के पहले बैरिस्टर मुंशी राम सहाय फारसी के विद्वान थे। वे मिर्जापुर में रहते थे। उस दौरान यह इलाका जंगल का था और देवरिया से तीन परिवार बसने आए थे। मुंशी राम सहाय ने सन 1706 में इस रामायण को फारसी में अनुवाद कराया था। यह वाल्मीकि रामायण का अनुवाद है। उनकी सातवीं पीढ़ी में डॉ. अशोक कुमार और उनके भाई हर्ष प्रसाद ने बेतियाहाता स्थित अपने आवास में इस रामायण को संभाल कर रखा है।
जहां राम-सीता का जिक्र वहां लाल स्याही का इस्तेमाल
रामायण में करीब 250 पन्ने हैं और इसे हाथ से लिखा गया है। जहां-जहां राम-सीता का जिक्र है वहां लाल स्याही और बाकी जगह पर काली स्याही का इस्तेमाल हुआ है। इसका कवर पृष्ठ करीब नष्ट हो चुका है, लेकिन उसके टुकड़ों को संजोकर रखा गया है।
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