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काशी हिंदू विश्वविद्यालय (बीएचयू)
– फोटो : अमर उजाला
विस्तार
चिकित्सा विज्ञान संस्थान (आईएमएस) बीएचयू में बिना लाइसेंसही आयुर्वेदिक दवाएं बनाई व बेची जा रही हैं। यह मामला शासन तक पहुंचा, फिर भी कुछ नहीं हुआ। ओपीडी में आने वाले मरीजों को भी यही दवाएं दी जा रही हैं। बीएचयू के आयुर्वेदिक संकाय की ओपीडी में रोजाना एक हजार मरीज आते हैं। सब अलग-अलग विशेषज्ञ डॉक्टरों को दिखाते, फिर परिसर स्थित फार्मेसी काउंटर से दवाएं लेते हैं।
इसी बीच पता चला कि बीएचयू के पास आयुर्वेदिक दवाएं बनाने और उसे बेचने का लाइसेंस ही नहीं है। जो लाइसेेंस बनवाया गया था, उसका नवीनीकरण ही नहीं कराया गया। लापरवाही का सिलसिला अब तक जारी है।
जानकारी के मुताबिक, इसी महीने की दो जनवरी को क्षेत्रीय आयुर्वेदिक एवं यूनानी अधिकारी डॉ. भावना द्विवेदी ने आयुर्वेदिक फार्मेसी के अधीक्षक प्रो. डीएन सिंह गौतम को पत्र भेजकर लाइसेंस के बारे में जानकारी मांगी थी। तब पता चला कि बीएचयू की तरफ से नवीनीकरण के लिए कई बार पत्राचार किया गया, लेकिन अभी तक कुछ नहीं हो सका।
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