Firozabad: बच्चे के फेफड़ों में फंसा मूंगफली का दाना, झोलाछाप निमोनिया का करता रहा इलाज, ट्रामा सेंटर में बची जान

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ऑपरेशन से निकाला गया मूंगफली का दाना

ऑपरेशन से निकाला गया मूंगफली का दाना
– फोटो : अमर उजाला

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नीम हकीम खतरा-ए-जान यानि ऐसा व्यक्ति जिसके पास अल्पज्ञान है, उसके उपचार से मरीज की जान खतरे में पड़ सकती है। फिरोजाबाद में इसी तरह का एक मामला सामने आया है। यहां डेढ़ साल के बच्चे ने मूंगफली का दाना निगल लिया था। मूंगफली का दाना फेंफड़ों में फंसने से सांस फूलने लगी तो परिजन कस्बा के ही झोलाछाप के पास इलाज कराने ले गए। 

झोलाछाप ने बच्चे को निमोनिया बताकर उसका इलाज शुरू कर दिया। बच्चे को तकलीफ ज्यादा बढ़ गई तो परिजन प्राइवेट ट्रामा सेंटर लाए। चिकित्सकों ने जांच की। इसके बाद पता चला कि उसके फेफड़ों में मूंगफली का दाना फंसा है। चिकित्सकों ने दूरबीन विधि से ऑपरेशन कर बच्चे के फेफड़े से मूंगफली का दाना निकाला। तब जाकर बच्चे की जान बच सकी।

एटा जिले के कस्बा अवागढ़ निवासी डेढ़ साल का आरव ने मूंगफली का दाना निगल लिया था। दाना आरव के फेंफड़ों में फंस गया था। इससे सांस फूलने के साथ लगातार खांसी आने लगी। परिजन कस्बा के एक झोलाछाप के पास ले गए। यहां पर निमोनिया समझकर बच्चे का इलाज शुरू कर दिया। फेफड़ों में जब यह दाना फूल गया तो सांस लेने में तकलीफ होने लगी। 

दूरबीन विधि से किया ऑपरेशन 

परिजन बुधवार की सुबह चार बजे बच्चे को फिरोजाबाद के प्राइवेट ट्रामा सेंटर में लेकर आए। ईएनटी विशेषज्ञ डॉ. भानुप्रताप ने सिटी स्कैन कराया तो बालक के फेंफड़ों में मूंगफली का दाना फंसा था। इसके बाद डॉ. भानुप्रताप, डॉ. डीसी शर्मा ने दूरबीन विधि से बच्चे का ऑपरेशन किया। 20 मिनट के ऑपरेशन में बच्चे के फेफड़े से मूंगफली का दाना निकाला। 

डॉ. भानुप्रताप ने बताया कि मूंगफली का दाना फेंफड़ों में फंसकर फूल गया था। इस कारण सांस की नली रुकती जा रही थी। अगर ऑपरेशन नहीं किया जाता तो सांस पूरी तरह रुक जाती। बालक को गंभीरवस्था में भर्ती कराया गया था। ऑपरेशन के बाद बालक की जान बच सकी। 

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नीम हकीम खतरा-ए-जान यानि ऐसा व्यक्ति जिसके पास अल्पज्ञान है, उसके उपचार से मरीज की जान खतरे में पड़ सकती है। फिरोजाबाद में इसी तरह का एक मामला सामने आया है। यहां डेढ़ साल के बच्चे ने मूंगफली का दाना निगल लिया था। मूंगफली का दाना फेंफड़ों में फंसने से सांस फूलने लगी तो परिजन कस्बा के ही झोलाछाप के पास इलाज कराने ले गए। 

झोलाछाप ने बच्चे को निमोनिया बताकर उसका इलाज शुरू कर दिया। बच्चे को तकलीफ ज्यादा बढ़ गई तो परिजन प्राइवेट ट्रामा सेंटर लाए। चिकित्सकों ने जांच की। इसके बाद पता चला कि उसके फेफड़ों में मूंगफली का दाना फंसा है। चिकित्सकों ने दूरबीन विधि से ऑपरेशन कर बच्चे के फेफड़े से मूंगफली का दाना निकाला। तब जाकर बच्चे की जान बच सकी।

एटा जिले के कस्बा अवागढ़ निवासी डेढ़ साल का आरव ने मूंगफली का दाना निगल लिया था। दाना आरव के फेंफड़ों में फंस गया था। इससे सांस फूलने के साथ लगातार खांसी आने लगी। परिजन कस्बा के एक झोलाछाप के पास ले गए। यहां पर निमोनिया समझकर बच्चे का इलाज शुरू कर दिया। फेफड़ों में जब यह दाना फूल गया तो सांस लेने में तकलीफ होने लगी। 



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