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सांप के डंसने पर हार्ट अटैक से होती है दो तिहाई मौतें
– फोटो : अमर उजाला
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आप अगर रात में घर से निकल रहे हैं या फिर अंधेरे में कमरे में जा रहे हैं तो सावधान हो जाएं। वजह बारिश और जलभराव के बाद सांप सीवान और खेत छोड़कर गांव में चले आए हैं। ऐसे में जरा सी चूक हुई तो वह डंस ले रहे हैं। जानकार बताते हैं कि बारिश के मौसम में आम दिनों की तुलना में सर्प दंश की घटनाएं पांच से छह गुना बढ़ जाती हैं। यहीं नहीं, आमतौर पर देखा गया है कि सर्पदंश से दो तिहाई मौतें हार्ट अटैक से होती हैं।
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जनपद में सर्पदंश की घटनाएं बढ़ने लगी हैं। हालांकि समय से इलाज शुरू होने से किसी की जान बच जा रही है तो देरी करने पर खतरे में भी पड़ जा रही है। चिकित्सक बताते हैं कि इस मौसम में सावधानी की जरूरत है। अगर सांप डंसता है तो झाड़फूंक में न फंसकर पीड़ित को लेकर तत्काल अस्पताल आए, नहीं तो मरीज की जान जा सकती है। वहीं, पक्षी विज्ञानियों के मुताबिक सांप बहरा होने के कारण सुनते नहीं हैं। आंखों के सहारे हिलती-डुलती चीज को देखकर और धरती के कंपन के अनुमान पर आक्रमण करते हैं। सांप जब हमलावर दिखें तो भागने की बजाय उनके ऊपर कपड़ा या रूमाल फेंकना चाहिए, जिससे वह उसमें फंस जाएं। सर्पदंश पर घबराये नहीं, आराम से लेट जायें, कपडे़ ढीले कर दें, चूड़ी, कड़े, घड़ी अंगूठी जैसे आभूषण निकाल दें। छोटे बच्चे, वृद्ध और अन्य बीमारियों से पीड़ित व्यक्तियों में जहर का असर गंभीर हो सकता है, इनके उपचार में देरी न करें। घाव के साथ छेड़छाड़ न करें। दौड़ने भागने से जहर तेजी से शरीर में फैलता है। सर्प दंश से पीड़ित व्यक्ति को मदिरा, नशे की कोई चीज और कैफीनेटेड ड्रिंक्स न दें। झांड़-फूंक से बचें और पीड़ित को जल्द अस्पताल ले जाएं। इससे मरीज को बचाया जा सकता है।
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