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ग्रेट हिमालयन नेशनल पार्क में ब्लू शीप।
– फोटो : अमर उजाला
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हिमाचल प्रदेश में ग्रेट हिमालयन नेशनल पार्क कुल्लू में एक दशक में ब्लू शीप की संख्या करीब दोगुना तक बढ़ गई है। वहीं, दुर्लभ वन्य जीव कस्तूरी मृग की संख्या भी पहले से अधिक पाई गई है। इसका खुलासा पार्क प्रबंधन की ओर से अक्तूबर में की गई गणना से हुआ है। यह पार्क 905.4 वर्ग किलोमीटर तक फैला हुआ है। 17 से 23 अक्तूबर तक पार्क प्रबंधन ने कस्तूरी मृग, ब्लू शीप और भूरा भालू की गणना की थी। इसके लिए पार्क प्रबंधन की टीमों ने स्वयंसेवियों की भी मदद ली। इसके लिए छह टीमों का गठन किया गया और हर टीम में आठ से दस लोग शामिल थे। अब पार्क प्रबंधन ने इसका डाटा तैयार कर दिया है। इसमें ब्लू शीप की मौजूदगी 2010-11 की गणना के मुकाबले दोगुना पाई गई। टीम को कई जगहों ब्लू शीप के झुंड मिले हैं और हर वर्ग किलोमीटर में पाए गए झुंड में इनकी संख्या दस तक पाई गई। एक दशक पूर्व की गणना में इनकी उपस्थिति चार से पांच पाई गई थी।
ब्लू शीप का ठिकाना समुद्रतल से करीब 3,500 मीटर ऊंचाई पर होता है और पार्क में ब्लू शीप का आवास करीब 60 से 70 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में है। वहीं, विलुप्त होने के कगार पर पहुंचे कस्तूरी मृग की संख्या भी 2010-11 की गणना में अधिक पाई गई है। इस दौरान आवासों में यह संख्या अमूमन दो थी, जबकि ताजा गणना में दो से चार तक मिली है। कस्तूरी मृग की मौजूदगी करीब 3,000 मीटर की ऊंचाई वाले इलाकों में रहती है। ग्रेट हिमालयन नेशनल पार्क में लगभग 30 से 40 वर्ग किलोमीटर पर ही कस्तूरी मृग का ठिकाना है। पार्क के एसीएफ मुनीश रांगड़ा ने कहा कि पार्क प्रबंधन ने अक्तूबर में कस्तूरी मृग, ब्लू शीप और भूरा भालू की गणना अलग-अलग मापदंड से की है। इस गणना के दौरान पार्क में भूरा भालू की मौजूदगी टीम को नहीं मिली है।
आवाज, दूरबीन और स्कैनिंग से की गणना
ग्रेट हिमालयन नेशनल पार्क में कस्तूरी मृग, ब्लू शीप (नीली भेड़) और भूरा भालू की गणना आवाज, दूरबीन और स्कैनिंग से की गई। कस्तूरी मृग की गणना उनके आवास स्थलों के आसपास से आवाज के जरिये की गई, जबकि भूरा भालू और ब्लू शीप की दूरबीन या दूसरे उपकरणों से स्कैनिंग की गई। गणना में हर प्वाइंट पर दो-दो टीमें मौजूद रहती हैं।
अवैध शिकार पर रोक से हुई बढ़ोतरी
पार्क के वनमंडलाधिकारी निशांत मंढोत्रा ने कहा कि ग्रेट हिमायलन नेशनल पार्क में ब्लू शीप और कस्तूरी मृग के बढ़ने का कारण पार्क में अवैध शिकार पर लगी रोक है। वहीं, पार्क क्षेत्र में नियमित रूप से गश्त रहती है और जगह-जगह स्थापित ट्रैप कैमरों से भी नजर रखी जा रही है।
कस्तूरी के लिए होता है मृग का शिकार
कस्तूरी मृग एक दुर्लभ प्रजाति और दुनिया में तेजी से विलुप्त होने वाला वन्यजीव है। अपनी आकर्षक खूबसूरती के साथ-साथ यह जीव नाभि से निकलने वाली खुशबू के लिए प्रसिद्ध है। यह पोटली (कस्तूरी) इस मृग की सबसे बड़ी पहचान है। नर मृग की नाभि में यह कस्तूरी होती है, जिसकी कीमत लाखों में होती है। इसकी कस्तूरी के लिए ही इस वन्य जीव का शिकार होता है। कस्तूरी का इत्र के अलावा कई औषधियों में इस्तेमाल होने के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में इसकी कीमत लाखों में है।
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