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DDU Gorakhpur
– फोटो : अमर उजाला
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दलहन और तिलहनी फसलों के अलावा सब्जियों पर हमला करने वाले फाइटो प्लाज्मा कीट बहुत ही चालाक-मक्कार माने जाते हैं। कीटनाशक दवाओं का छिड़काव होते ही ये कीट अपना ठिकाना बदल देते हैं। खेत की मेड़ पर उगे खर-पतवार में छिप जाते हैं। जैसे ही कीटनाशक का असर कम होता है फसलों को चट कर जाते है।
गोरखपुर विश्वविद्यालय का बॉयोटेक्नोलॉजी विभाग ने पांच साल के शोध में करीब 200 पौधों में फाइटो प्लाज्मा जनित बीमारियों की पहचान की है। पाया गया है कि इस बीमारी को रोकने के लिए निरंतर पौधों की निगरानी जरूरी है। समय रहते पौधे के ग्रसित टहनी को हटाकर उसके प्रसार को रोका जा सकता है।
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