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मुरादाबाद में दिवाली उत्सव
– फोटो : अमर उजाला
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गोवर्धन पूजा मंगलवार को ही मनाई जाएगी। इस पर्व का संबंध सीधे प्रकृति और मानव से हैं। लाइनपार स्थित ज्योतिष विज्ञान नवग्रह अनुसंधान केंद्र के संचालक ज्योतिषाचार्य अखिलेश पांडेय ने यह दावा किया है। ज्योतिष आचार्य पंडित अखिलेश पांडेय ने बताया कि गोवर्धन पूजा या अन्न कूट का त्योहार हिंदू कैलेंडर के अनुसार कार्तिक मास में शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा अर्थात दिवाली के दूसरे दिन मनाया जाता है।
इस दिन गोवर्धन पर्वत, भगवान श्रीकृष्ण और गोमाता की पूजा की जाती है। इस साल कार्तिक माह के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि की शुरुआत 13 नवंबर की दोपहर दो बजकर 56 मिनट से हो रही है। तिथि का समापन 14 नवंबर दोपहर दो बजकर 36 मिनट पर होगा। उदया तिथि के अनुसार गोवर्धन पूजा 14 नवंबर की सुबह 6 बजकर 37 मिनट से आठ बजकर 46 मिनट तक होगी।
ऐसे करें गोवर्धन पूजा
गोवर्धन पूजा के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करना चाहिए। शुभ मुहूर्त में गाय के गोबर से गिरिराज गोवर्धन पर्वत की आकृति बनाएं। साथ ही पशुधन यानी गाय, बछड़े आदि की आकृति भी बनाएं।इसके बाद धूप-दीप आदि से विधिवत पूजा करें। भगवान कृष्ण को दुग्ध से स्नान कराने के बाद उनका पूजन करें। इसके बाद अन्नकूट का भोग लगाएं।
ज्योतिष आचार्य का दावा
ज्योतिष आचार्य पंडित अखिलेश पांडेय का दावा है कि पौराणिक मान्यताओं के अनुसार भगवान कृष्ण द्वारा ही सर्वप्रथम गोवर्धन पूजा शुरू कराई गई थी। भगवान श्रीकृष्ण ने गोवर्धन पर्वत को अपनी उंगली पर उठाकर इंद्रदेव के क्रोध से ब्रज वासियों और पशु-पक्षियों की रक्षा की थी। यही कारण है कि गोवर्धन पूजा में गिरिराज के साथ कृष्ण जी के पूजन का भी विधान है। इस दिन अन्नकूट का विशेष महत्व माना जाता है।
गोवर्धन पूजा पर अन्नकूट उत्सव
गोवर्धन पूजा के मौके पर मंदिरों में अन्न कूट का आयोजन किया जाता है। कुछ स्थानों पर विशेष रूप से बाजरे की खिचड़ी बनाई जाती है। साथ ही तेल की पूड़ी आदि बनाने की परंपरा है। अन्न कूट के साथ-साथ दूध से बनी मिठाई और स्वादिष्ट पकवान का भोग लगाया जाता है। पूजन के बाद इन पकवानों को प्रसाद के रूप में श्रद्धालुओं को बांटा जाता है।
अर्धमौनी ने श्रीगोवर्धन की कथा का किया वर्णन
श्रीगोवर्धन पूजन-अन्नकूट-महोत्सव एवं छप्पन-भोग में कथा संकीर्तन का आयोजन हुआ। कथा व्यास धीरशांत दास अर्धमौनी ने कहा कि देवराज इंद्र का घमंड तोड़ने के लिए भगवान श्रीकृष्ण ने गोवर्धन लीला की। यह कथा फकीर पुरा आदर्श कालोनी मैदान में आयोजित हुई। भगवान गिरिराज की भव्य झांकी, छप्पन-भोग एवं भंडारे में हर्षोल्लास से पूजन हुआ।
अर्धमौनी ने बताया कि भजन में भगवान के नाम का संकीर्तन एक स्वर, एक ताल से यदि किया जाय तो मन तृप्ति को प्राप्त करता है। ऐसे कीर्तन में सात्त्विक एवं अलौकिक रस आता है, जोकि परमात्मा की प्राप्ति में बहुत सहायक है। दीपावली अंतर्मन के दीप जलाने का पर्व है।
काम, क्रोध, लोभ और मोह जैसी घनघोर अमावस में ज्ञान रुपी दीप प्रज्वलित कर भीतर के तम का नाश करना ही इस पर्व का मुख्य उद्देश्य है। व्यवस्था में कैलाश शर्मा, हरिओम शर्मा, दीपा शर्मा, यतेंद्र शर्मा, भानुप्रताप शर्मा, मंजू शर्मा, रंजना शर्मा, रोहित शर्मा, विशाल शर्मा, भावना शर्मा, मनीष कुमार, माया अरोड़ा, निखिल पाल आदि ने सहयोग दिया।
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