Hamirpur News: मधुमक्खी और शहद को अब नुकसान नहीं पहुंचा पाएंगे रंगड़

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एमएससी की छात्रा कनिका अवस्थी ने बनाए वास्प ट्रैप।

एमएससी की छात्रा कनिका अवस्थी ने बनाए वास्प ट्रैप।
– फोटो : संवाद

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मधुमक्खी, मधुमक्खी के शहद और फलों को रंगड़ों (वास्प) से बचाना अब आसान होगा। उद्यानिकी एवं वानिकी महाविद्यालय नेरी की एमएससी की छात्रा कनिका अवस्थी ने कीट विज्ञान विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. वीरेंद्र राणा के मार्गदर्शन में रंगड़ों से संरक्षण को लेकर शोध किया है। शोध के दौरान कनिका ने चार तरह के रंगड़ ट्रैप तैयार किए हैं। यह विशेष किस्म के ट्रैप ट्रायल के दौरान मधुमक्खी, मधुमक्खी के शहद और फलों को रंगड़ों से बचाने में काफी कारगर साबित हुए हैं।

खास बात यह है कि इन विशेष किस्म के ट्रैप को तैयार करने में बहुत कम लागत आई है। मुधमक्खी संरक्षण को लेकर शोध कार्य हाल ही में पूरा हुआ है। कीट विज्ञान विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. वीरेंद्र राणा ने बताया कि वर्तमान में मधुमक्खी पालन को अधिकतर लोग अब व्यवसाय के रूप में लेकर स्वरोजगार सृजन की ओर बढ़ रहे हैं। सरकार की ओर से मुख्यमंत्री मधुमक्खी पालन विकास योजना की तर्ज पर कई ऐसी योजनाएं शुरू की गई हैं, जिसके लिए उद्यान विभाग के माध्यम से 70 से 80 फीसदी तक अनुदान मिलता है।

अधिकतर लोगों की यही शिकायत रहती थी कि मधुमक्खी की कॉलोनी में वास्प यानी रंगड़ आमतौर पर प्रवेश करके मधुमक्खियों और शहद को खा जाते हैं। विषय को गंभीरता से लेते हुए छात्रा कनिका अवस्थी ने पढ़ाई के दौरान मधुमक्खियों के संरक्षण को लेकर शोध कार्य करने में गहन रुचि दिखाकर इसमें सफलता पाई है। महाविद्यालय के डीन डॉ. सोमदेव शर्मा ने कहा कि महाविद्यालय में शिक्षार्थी वरिष्ठ वैज्ञानिकों के मार्गदर्शन में नए शोध कार्यों में रुचि ले रहे हैं।

इस तरह बनाए चार ट्रैप 
सबसे पहले चार किस्म के वास्प ट्रैप बनाकर ट्रायल शुरू किया। चारों किस्म के ट्रैप में बिल्कुल कम पैसे की लागत से प्लास्टिक की खाली बोतलों को लेकर अलग-अलग किस्म के 4 तरह के घोल तैयार किए। उनमें एक किस्म के ट्रैप के लिए शुगर सलूशन यानी पानी और चीनी का घोल तैयार कर ट्रैप को कॉलोनी में स्थापित कर दिया। इसी तरह हनी सलूशन में पुराने शहद को उपयोग में लाकर दूसरे ट्रैप के रूप में उसी हनी बी कॉलोनी में दूसरी जगह स्थापित कर दिया। इसी तरह तीसरे ट्रैप के रूप में गुड़ के घोल का इस्तेमाल किया।

वहीं पर चौथे ट्रैप के रूप में चीनी के घोल में हेप्टाइल ब्यूटीरेट को अट्रेक्टेंट के रूप मे मिक्स कर दिया। इसके अलावा सिरका, डिशशॉप और ईस्ट का भी ट्रैप निर्माण करने वाले घोल में मिश्रण किया। क्योंकि सिरका की दुर्गंध से मधुमक्खियां स्थापित ट्रैप की ओर आकर्षित नहीं होती हैं। इस तरह से 4 किस्म के ट्रैप बनाकर हनी बी कॉलोनी में उन्हें स्थापित किया। कनिका ने कहा कि धीरे-धीरे ट्रैप स्थापित करने के एक हफ्ते के बाद हनी बी कॉलोनी में आने वाले रंगड़ फिर ट्रैप की ओर आकर्षित होने लगे। ट्रैप में घुसकर रंगड़ मरने लगे। 

विस्तार

मधुमक्खी, मधुमक्खी के शहद और फलों को रंगड़ों (वास्प) से बचाना अब आसान होगा। उद्यानिकी एवं वानिकी महाविद्यालय नेरी की एमएससी की छात्रा कनिका अवस्थी ने कीट विज्ञान विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. वीरेंद्र राणा के मार्गदर्शन में रंगड़ों से संरक्षण को लेकर शोध किया है। शोध के दौरान कनिका ने चार तरह के रंगड़ ट्रैप तैयार किए हैं। यह विशेष किस्म के ट्रैप ट्रायल के दौरान मधुमक्खी, मधुमक्खी के शहद और फलों को रंगड़ों से बचाने में काफी कारगर साबित हुए हैं।

खास बात यह है कि इन विशेष किस्म के ट्रैप को तैयार करने में बहुत कम लागत आई है। मुधमक्खी संरक्षण को लेकर शोध कार्य हाल ही में पूरा हुआ है। कीट विज्ञान विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. वीरेंद्र राणा ने बताया कि वर्तमान में मधुमक्खी पालन को अधिकतर लोग अब व्यवसाय के रूप में लेकर स्वरोजगार सृजन की ओर बढ़ रहे हैं। सरकार की ओर से मुख्यमंत्री मधुमक्खी पालन विकास योजना की तर्ज पर कई ऐसी योजनाएं शुरू की गई हैं, जिसके लिए उद्यान विभाग के माध्यम से 70 से 80 फीसदी तक अनुदान मिलता है।

अधिकतर लोगों की यही शिकायत रहती थी कि मधुमक्खी की कॉलोनी में वास्प यानी रंगड़ आमतौर पर प्रवेश करके मधुमक्खियों और शहद को खा जाते हैं। विषय को गंभीरता से लेते हुए छात्रा कनिका अवस्थी ने पढ़ाई के दौरान मधुमक्खियों के संरक्षण को लेकर शोध कार्य करने में गहन रुचि दिखाकर इसमें सफलता पाई है। महाविद्यालय के डीन डॉ. सोमदेव शर्मा ने कहा कि महाविद्यालय में शिक्षार्थी वरिष्ठ वैज्ञानिकों के मार्गदर्शन में नए शोध कार्यों में रुचि ले रहे हैं।

इस तरह बनाए चार ट्रैप 

सबसे पहले चार किस्म के वास्प ट्रैप बनाकर ट्रायल शुरू किया। चारों किस्म के ट्रैप में बिल्कुल कम पैसे की लागत से प्लास्टिक की खाली बोतलों को लेकर अलग-अलग किस्म के 4 तरह के घोल तैयार किए। उनमें एक किस्म के ट्रैप के लिए शुगर सलूशन यानी पानी और चीनी का घोल तैयार कर ट्रैप को कॉलोनी में स्थापित कर दिया। इसी तरह हनी सलूशन में पुराने शहद को उपयोग में लाकर दूसरे ट्रैप के रूप में उसी हनी बी कॉलोनी में दूसरी जगह स्थापित कर दिया। इसी तरह तीसरे ट्रैप के रूप में गुड़ के घोल का इस्तेमाल किया।

वहीं पर चौथे ट्रैप के रूप में चीनी के घोल में हेप्टाइल ब्यूटीरेट को अट्रेक्टेंट के रूप मे मिक्स कर दिया। इसके अलावा सिरका, डिशशॉप और ईस्ट का भी ट्रैप निर्माण करने वाले घोल में मिश्रण किया। क्योंकि सिरका की दुर्गंध से मधुमक्खियां स्थापित ट्रैप की ओर आकर्षित नहीं होती हैं। इस तरह से 4 किस्म के ट्रैप बनाकर हनी बी कॉलोनी में उन्हें स्थापित किया। कनिका ने कहा कि धीरे-धीरे ट्रैप स्थापित करने के एक हफ्ते के बाद हनी बी कॉलोनी में आने वाले रंगड़ फिर ट्रैप की ओर आकर्षित होने लगे। ट्रैप में घुसकर रंगड़ मरने लगे। 



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