Hamirpur News: हमीरपुर से निर्दलीय जीते आशीष फिर चर्चा में, सुक्खू के बाद धूमल से की मुलाकात

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विधायक आशीष शर्मा।

विधायक आशीष शर्मा।
– फोटो : संवाद

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विधानसभा क्षेत्र हमीरपुर से निर्दलीय विधायक आशीष शर्मा चुनाव जीतने के बाद फिर चर्चा में आ गए हैं। आने वाले दिनों में वे किस दल में शामिल होंगे, इसे लेकर राजनीति के जानकारों में अटकलें शुरू हो गई हैं। अब चर्चा में आने का कारण उनका भाजपा और कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं से मुलाकात है। हमीरपुर विधानसभा सीट से निर्दलीय चुनाव जीतने के बाद आशीष शर्मा बीते सप्ताह मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू को बधाई देने शिमला पहुंचे थे।

अब गत दिवस वह समीरपुर में पूर्व मुख्यमंत्री प्रेम कुमार धूमल से मिले हैं। सुक्खू सरकार में नए मंत्रिमंडल गठन से पूर्व आशीष शर्मा जिस तरह से कांग्रेस सरकार के मुख्यमंत्री और अब भाजपा के पूर्व मुख्यमंत्री से मिले हैं, उससे कई तरह की चर्चा हमीरपुर में है।

दोनों दलों से टिकट न मिलने पर आजाद लड़ा चुनाव
आशीष शर्मा पिछले दो साल से हमीरपुर से चुनाव लड़ने को लेकर सक्रिय रहे थे। भाजपा के टिकट को लेकर करवाए सर्वे में आशीष शर्मा का नाम सबसे उपर था। लेकिन, संगठन के भारी विरोध के चलते उन्हें टिकट नहीं मिल पाया। इसके बाद आशीष शर्मा दिल्ली में हिमाचल कांग्रेस प्रभारी राजीव शुक्ला से मिले। शुक्ला के आशीर्वाद के बाद आशीष शर्मा ने कांग्रेस की टिकट पर चुनाव नामांकन भरा। लेकिन, यहां भी कांग्रेस जुबान देकर मुकर गई।

इसके बाद आशीष शर्मा ने निर्दलीय चुनाव लड़ने का फैसला लिया और चुनाव में जीत दर्ज की। आशीष ने सत्तादारी जयराम सरकार में हमीरपुर से विधायक नरेंद्र ठाकुर को तीसरे स्थान पर धकेला। जबकि, कांग्रेस प्रत्याशी डॉ. पुष्पेंद्र वर्मा दूसरे स्थान पर रहे। आशीष शर्मा को कुल 25,916 वोट मिले। जबकि भाजपा के नरेंद्र ठाकुर को 12,794 और कांग्रेस को 13,017 वोट मिले। जीत के दोगुने अंतर को देखकर भाजपा और कांग्रेस में राजनीतिक के चाणक्य भी हैरान हैं।

पार्टी ज्वाइन की तो मचेगी भाजपा और कांग्रेस में उथल-पुथल
आशीष शर्मा अगर भाजपा या कांग्रेस दोनों में से किसी दल को ज्वाइन करते हैं तो विधानसभा क्षेत्र हमीरपुर में काफी उथल-पुथल मच सकती है। क्योंकि भाजपा और कांग्रेस दोनों दलों में जो पूर्व में विधायक रह चुके हैं, उनके अलावा टिकट के दावेदारों की एक लंबी फेहरिस्त है। कांग्रेस से पूर्व सीपीएस अनीता वर्मा और कुलदीप पठानिया को पीछे धकेल कर इस बार डॉ. पुष्पेंद्र वर्मा ने चुनाव लड़ा।

लेकिन, जीत हासिल नहीं हुई। इस बार के चुनाव में हमीरपुर सीट से सुनील शर्मा बिट्टू का नाम भी टिकट पैनल में सबसे ऊपर था। लेकिन, टिकट न मिलने पर अब उन्हें मुख्यमंत्री के राजनीतिक सलाहकार के तौर पर कैबिनेट रैंक मिला है। इसी तरह भाजपा में पूर्व विधायक नरेंद्र ठाकुर और पूर्व सीपीएस उर्मिल ठाकुर के अलावा नरेंद्र अत्री, नवीन शर्मा, अजय शर्मा समेत अन्य कई लोग हैं जो टिकट की दौड़ में शामिल रहे हैं।

अगले पांच साल तक जनता की सेवा करूंगा 
जिला हमीरपुर को सुखविंद्र सिंह सुक्खू के रूप में मुख्यमंत्री मिलना गौरव की बात है। शिमला में पहुंचकर मुख्यमंत्री को बधाई दी है। उन्होंने हमीरपुर विस क्षेत्र के विकास में हर संभव सहयोग का आश्वासन दिया है। वहीं, समीरपुर में पूर्व मुख्यमंत्री प्रेम कुमार धूमल से भी आशीर्वाद लिया है, लेकिन यह दोनों शिष्टाचार भेंट थीं। 2027 अभी बहुत दूर है, किस पार्टी से चुनाव लड़ूंगा, इस बारे में अभी कुछ नहीं कह सकता। अगले पांच साल तक हमीरपुर की जनता की सेवा करूंगा। – आशीष शर्मा, विधायक विस क्षेत्र हमीरपुर।

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विधानसभा क्षेत्र हमीरपुर से निर्दलीय विधायक आशीष शर्मा चुनाव जीतने के बाद फिर चर्चा में आ गए हैं। आने वाले दिनों में वे किस दल में शामिल होंगे, इसे लेकर राजनीति के जानकारों में अटकलें शुरू हो गई हैं। अब चर्चा में आने का कारण उनका भाजपा और कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं से मुलाकात है। हमीरपुर विधानसभा सीट से निर्दलीय चुनाव जीतने के बाद आशीष शर्मा बीते सप्ताह मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू को बधाई देने शिमला पहुंचे थे।

अब गत दिवस वह समीरपुर में पूर्व मुख्यमंत्री प्रेम कुमार धूमल से मिले हैं। सुक्खू सरकार में नए मंत्रिमंडल गठन से पूर्व आशीष शर्मा जिस तरह से कांग्रेस सरकार के मुख्यमंत्री और अब भाजपा के पूर्व मुख्यमंत्री से मिले हैं, उससे कई तरह की चर्चा हमीरपुर में है।

दोनों दलों से टिकट न मिलने पर आजाद लड़ा चुनाव

आशीष शर्मा पिछले दो साल से हमीरपुर से चुनाव लड़ने को लेकर सक्रिय रहे थे। भाजपा के टिकट को लेकर करवाए सर्वे में आशीष शर्मा का नाम सबसे उपर था। लेकिन, संगठन के भारी विरोध के चलते उन्हें टिकट नहीं मिल पाया। इसके बाद आशीष शर्मा दिल्ली में हिमाचल कांग्रेस प्रभारी राजीव शुक्ला से मिले। शुक्ला के आशीर्वाद के बाद आशीष शर्मा ने कांग्रेस की टिकट पर चुनाव नामांकन भरा। लेकिन, यहां भी कांग्रेस जुबान देकर मुकर गई।

इसके बाद आशीष शर्मा ने निर्दलीय चुनाव लड़ने का फैसला लिया और चुनाव में जीत दर्ज की। आशीष ने सत्तादारी जयराम सरकार में हमीरपुर से विधायक नरेंद्र ठाकुर को तीसरे स्थान पर धकेला। जबकि, कांग्रेस प्रत्याशी डॉ. पुष्पेंद्र वर्मा दूसरे स्थान पर रहे। आशीष शर्मा को कुल 25,916 वोट मिले। जबकि भाजपा के नरेंद्र ठाकुर को 12,794 और कांग्रेस को 13,017 वोट मिले। जीत के दोगुने अंतर को देखकर भाजपा और कांग्रेस में राजनीतिक के चाणक्य भी हैरान हैं।

पार्टी ज्वाइन की तो मचेगी भाजपा और कांग्रेस में उथल-पुथल

आशीष शर्मा अगर भाजपा या कांग्रेस दोनों में से किसी दल को ज्वाइन करते हैं तो विधानसभा क्षेत्र हमीरपुर में काफी उथल-पुथल मच सकती है। क्योंकि भाजपा और कांग्रेस दोनों दलों में जो पूर्व में विधायक रह चुके हैं, उनके अलावा टिकट के दावेदारों की एक लंबी फेहरिस्त है। कांग्रेस से पूर्व सीपीएस अनीता वर्मा और कुलदीप पठानिया को पीछे धकेल कर इस बार डॉ. पुष्पेंद्र वर्मा ने चुनाव लड़ा।

लेकिन, जीत हासिल नहीं हुई। इस बार के चुनाव में हमीरपुर सीट से सुनील शर्मा बिट्टू का नाम भी टिकट पैनल में सबसे ऊपर था। लेकिन, टिकट न मिलने पर अब उन्हें मुख्यमंत्री के राजनीतिक सलाहकार के तौर पर कैबिनेट रैंक मिला है। इसी तरह भाजपा में पूर्व विधायक नरेंद्र ठाकुर और पूर्व सीपीएस उर्मिल ठाकुर के अलावा नरेंद्र अत्री, नवीन शर्मा, अजय शर्मा समेत अन्य कई लोग हैं जो टिकट की दौड़ में शामिल रहे हैं।

अगले पांच साल तक जनता की सेवा करूंगा 

जिला हमीरपुर को सुखविंद्र सिंह सुक्खू के रूप में मुख्यमंत्री मिलना गौरव की बात है। शिमला में पहुंचकर मुख्यमंत्री को बधाई दी है। उन्होंने हमीरपुर विस क्षेत्र के विकास में हर संभव सहयोग का आश्वासन दिया है। वहीं, समीरपुर में पूर्व मुख्यमंत्री प्रेम कुमार धूमल से भी आशीर्वाद लिया है, लेकिन यह दोनों शिष्टाचार भेंट थीं। 2027 अभी बहुत दूर है, किस पार्टी से चुनाव लड़ूंगा, इस बारे में अभी कुछ नहीं कह सकता। अगले पांच साल तक हमीरपुर की जनता की सेवा करूंगा। – आशीष शर्मा, विधायक विस क्षेत्र हमीरपुर।



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