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1990 के दशक की शुरुआत में जब मेहता के पास पहले से ही अपने गैराज में 15-20 कारें थीं, तो शायद उन्हें लेक्सस एलएस 400 के लिए 45 लाख रुपये का भुगतान करने में कोई आपत्ति नहीं थी. एलएस 400 स्वचालित टेलीस्कोपिक और टिल्ट स्टीयरिंग व्हील के साथ-साथ एसआरएस एयरबैग, electrically adjustable सीट बेल्ट और एक इलेक्ट्रोक्रोमिक रियरव्यू मिरर के साथ मानक आने वाली पहली प्रीमियम लक्जरी सेडान में से एक थी. लेक्सस एलएस 400 एक प्रमुख लक्जरी सेडान है जिसमें 4000 सीसी इंजन है जो 4 स्पीड ऑटोमैटिक ट्रांसमिशन से जुड़ा है. 0 से 100 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार पकड़ने में इसे 8.5 सेकंड का समय लगा, जबकि इसकी टॉप स्पीड 250 किलोमीटर प्रति घंटा थी.
Lexus LS400 बनी पतन का कारण!
आपने सुना होगा: “कभी-कभी जो चीज़ें आपको सबसे अधिक पसंद होती हैं, वे आपके स्वास्थ्य के लिए सबसे अधिक हानिकारक हो जाती हैं.” हर्षद मेहता की कार ने उनके पतन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई. उस समय टाइम्स ऑफ इंडिया की स्तंभकार सुचेता दलाल ने भारतीय स्टेट बैंक के मुख्यालय के बाहर एलएस 400 को देखा और सोचा कि एक स्टॉकब्रोकर एक ऐसी कार कैसे खरीद सकता है जो अभी तक भारत में लॉन्च नहीं हुई है.
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