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कन्या लंगुरा को जिमाते हुए
– फोटो : अमर उजाला
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हर ओर मां अम्बे के जय जयकार, घर-घर कन्या लांगुराओं की खातिरदारी, भजन संध्या, डोलों के साथ झूमते भक्त, दंडौती, भक्तिमय वातावरण और विभिन्न कार्यक्रमों का रामनवमी के मौके पर आयोजन हुआ। बृहस्पतिवार को जिलेभर में हर तरफ अमृत की बदरिया बरसी। शहर भर के प्रमुख देवी मंदिरों में भक्तिों की भारी भीड़ के अलावा घण्टे, घड़ियालों की मधुर ध्वनि देर रात्रि तक गूंजती रही। श्रद्धाभाव से मां अम्बे के नवम स्वरूप मां सिद्धिदात्री की उपासाना की गई।
बुधवार की देर रात दंडौती लगाने का दौर चलता रहा। भक्तों की सेवा करने के लिए जगह जगह कैंप लगाए। मंदिरों में माता रानी के विग्रह की अलौकिक सजावट के साथ दर्जनों भव्य डोले शहर में निकाले गए। डोला में मइया की स्थापना कर शहर का भ्रमण कराया गया। श्रद्धालुओं ने मइया के भक्तिगीतों पर जमकर ठुमके लगाए। मंदिरों पर सुबह से लोग पूजा अर्चना के लिए पहुंचने लगे। कई प्रमुख मंदिरों पर भक्तों की भारी भीड़ रही। भक्तों को मातारानी के दर्शन हेतु घण्टों इंतजार करना पड़ा। चैत्र शुक्ल प्रतिपदा से शुरू ही नवरात्र व्रत बृहस्पतिवार को पूरे हुए। भक्त पिछले नौ दिनों से नवमी का इंतजार कर रहे थे। भक्तों ने विधि विधान से पूजा अर्चना कर उपवास खोला। नवरात्र के अंतिम दिन मां सिद्धिदात्री की उपासना की गई। इस दिन साधकों को सिद्धियां प्राप्ती होती हैं। भक्तों की मुरादें पूरी होती हैं।
नवरात्र के आखरी दिन शहर के देवी मंदिरों पर भक्तों का मेला सा लगा रहा। शाम तक पूजा अर्चना का कार्यक्रम चलता रहा। मंदिरों पर पैर रखने तक की जगह नहीं थी। भक्तों ने नम्बर आने पर मइया का दूध,घी व जल आदि से अभिषेक किया और लौंग, कपूर, सिंदूर, गुगर, फल, पुष्प आदि चढ़ाकर मनोकामनापूर्ति की कामना की। मां दुर्गा सबकी सुनने वाली हैं इसलिए मंदिरों पर बच्चे, वृद्व, महिला, पुरूष, युवक सभी आस्था की लाइन में लगे थे। शहर के शीतला माता मंदिर व बौहरे वाली देवी मंदिर पर हजारों की संख्या में भक्तों की भीड़ थी।
बौहरे वाली देवी मंदिर पर लम्बी-लम्बी लाइनें लगी थीं। भक्तों को घण्टों के इंतजार के बाद मइया के दर्शन हो सके। शाम होते ही देवी मंदिरों में प्यारा सजा है तेरा द्वार भवानी, मइया की हर बात निराली, मेरी भी सुनो ओ माता भवानी, अम्बे तू है जगदम्बे काली जैसे भक्ति गीत सुनाई देने लगे। नवमी पर मइया के विशेष श्रृंगार किए गए। सूर्यास्त के बाद ही मंदिरों में आस्था शैलाव उमड़ने लगा। देवी मंदिरों पर शाम होते ही भजन कीर्तन का दौर शुरू हो गया। मइया की आराधना की जाने लगी। मइया की एक झलक पाने कोस्क्त ललायित दिखे। देवी मंदिरों पर देर रात जागरण कार्यक्रम आदि भी चलते रहे।
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